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कमजोर कांग्रेस को बाजपुर की जीत से संजीवनी

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बाजपुर में निर्वाचित कांग्रेस प्रत्याशी गुरजीत सिंह गित्ते को प्रमाण पत्र देते आरओ एपी वाजपेयी - फोटो : BAZPUR
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रुद्रपुर। तराई में लगातार चुुनावों में हार के सिलसिले से कमजोर हो चुकी कांग्रेस को बाजपुर नगर पालिका की जीत ने संजीवनी देने का काम किया है। चुनाव में कार्यकर्ताओं की मेहनत, प्रत्याशी की बेहतर छवि के साथ ही अंतिम समय गुटबाजी किनारे कर आला नेताओं के एक मंच में आने से पार्टी ने लगातार चौथी बार पालिका पर कब्जा बरकरार रखा। लगातार मिलीं हार के बाद इस जीत ने हताश कांग्रेसियों में जोश का संचार किया है, वहीं दो कैबिनेट मंत्रियों के साथ ही पूरी ताकत झोंकने वाली सत्तारूढ़ भाजपा खेमे में निराशा है।
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दरअसल, तराई में बेहद मजबूत मानी जाने वाली कांग्रेस के लिए विधानसभा चुनाव से बुरे दिनों की शुरुआत हुई थी। तराई की नौ विधानसभाओं में से आठ सीटों पर कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा था। दो सीटों पर चुनाव लड़ने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत को किच्छा विधानसभा से करारी शिकस्त मिली थी। इस चुनाव से बुरी तरह से हिल चुकी कांग्रेस के लिए नवंबर में हुए निकाय चुनाव उम्मीद बनकर आए थे लेकिन दो निगमों सहित 15 निकायों में से कांग्रेस को दो पालिकाओं और दो नगर पंचायतों में ही जीत हासिल हो सकी थी। कांग्रेस को भाजपा ने सहकारिता चुनाव में तगड़ा झटका दिया था।
लोकसभा चुनाव में गुटबाजी में घिरे कांग्रेस ने नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीट पर सियासत के धुरंधर खिलाड़ी हरीश रावत को मैदान में उतारा था। कांग्रेसियों को हरदा से चमत्कार की उम्मीद थी लेकिन मोदी लहर ने उम्मीदों पर पानी फेर दिया। भाजपा के अजय भट्ट तीन लाख 39 हजार वोटों से जीतकर सांसद बन गए। इन हारों से कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं में निराशा थी। कांग्रेस संगठन भी घोर निराशा से भलीभांति परिचित था। लिहाजा बाजपुर में प्रत्याशी चयन से लेकर पूरे प्रचार तक स्थानीय कार्यकर्ताओं को पूरी तरजीह के साथ ही गुटबाजी की आंच तक यहां नहीं आने दी गई।
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अच्छी छवि के प्रत्याशी उतारकर स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ बेहद कसी रणनीति से चुनाव लड़ा गया और एक मंच पर प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, हरीश रावत और इंदिरा हृदयेश को लाकर कार्यकर्ताओं में एकजुटता का संदेश दिया गया। कुल मिलाकर मिशन बाजपुर की जीत निराश कार्यकर्ताओं में उम्मीद की रोशनी लेकर आई है। हालांकि, संगठन से इतर हरीश रावत की एकला चलो की नीति बरकरार है।
प्रदेशाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष से उनकी अदावत पुरानी है। यूथ कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर भी हरदा अपने पुराने सहयोगी रणजीत रावत के समर्थकों के निशाने पर रहे हैं। ऐसे में देखना है कि पंचायत चुनाव में ये इस जीत से मिले उत्साह का संचार और गुटबाजी से पार होकर कांग्रेस कितना बेहतर कर पाती है। फिलहाल तो कांग्रेस अभी जीत के जश्न और भाजपा हार से मिली मायूसी में है।
प्रतिष्ठ नहीं बचा पाए कैबिनेट मंत्री आर्य
रुद्रपुर। बाजपुर पालिका चुनाव को लेकर स्थानीय विधायक होने के नाते कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी थी। इसके अलावा, पुराना विधानसभा क्षेत्र होने के नाते कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे की भी सक्रियता थी।
पिछले निकाय चुनाव में बाजपुर को छोड़कर नगर पालिका महुआवाखेड़ागंज और नगर पंचायत सुल्तानपुर पट्टी में हुए चुनाव में भी भाजपा को शिकस्त का सामना करना पड़ा था। महुवाखेड़ागंज में कांग्रेस तो सुल्तानपुरपट्टी में निर्दलीय चुनाव जीते थे। इस लोकसभा चुनाव में भी बाजपुर विधानसभा से पिछले लोकसभा चुनाव के मुकाबले कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा था। लिहाजा मंत्री आर्य के लिए यह सीट प्रतिष्ठा से जोड़ी जा रही थी। हालांकि इस सीट को जीतने के लिए पूरी ताकत झोंकने के साथ ही मंत्री अरविंद पांडे को भी उतरना पड़ा था। लेकिन फिर भी कांग्रेस ने यह सीट भाजपा के पास जाने से रोकने में सफल हो गई।
- बाजपुर और श्रीनगर में जीत धनबल के आगे जनबल की जीत है। जीत से कार्यकर्ताओं का निश्चित रूप से मनोबल बढ़ा है। इसका पूरा श्रेय कार्यकर्ताओं की मेहनत को जाता है। कांग्रेस में कहीं मनमुटाव नहीं है। पार्टी में एकजुटता है। पंचायत चुनाव भी मजबूती से लड़कर जीतेंगे। - प्रीतम सिंह, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
- बाजपुर में कांग्रेस विजयी हुई है। राजनीति है तो कुछ रंगों की पिचकारियां तो एक दूसरे पर फेंकी जाएंगी, मगर ये जीत उत्तराखंड की जनता की जीत है। जहां मशीन से वोट पड़े हैं भाजपा जीती है और जहां जहां मुहर का इस्तेमाल हुआ है विपक्ष जीता है। कोशिश रहेगी की पंचायत चुनाव में भी इस सिलसिले को जारी रखेंगे। - हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री
- दोनों पालिकाओं में जीत इस बात का प्रमाण है कि कांग्रेस संगठन की जनता में गहरी पैठ है और जनता को कांग्रेस पर भरोसा है लेकिन निर्वाचन आयोग की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह भी है कि जहां ईवीएम वहां भाजपा, जहां बैलेट वहां कांग्रेस जीत रही है। इस जीत से कार्यकर्ताओं में ऊर्जा का संचार हुआ है और पंचायत चुनाव में दमदार प्रदर्शन करेंगे। - रणजीत सिंह रावत, बाजपुर चुनाव के पार्टी पर्यवेक्षक
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