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रूपेश व परवेंद्र ने बुढ़ना गांव में लगाई हवाई चप्पल बनाने की मशीन

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जखोली विकासखंड के बुढ़ना गांव के रूपेश गहरवार और परवेंद्र सिंह राणा ने गांव के बाजार में हवाई चप्पल बनाने की मैनवल हाइड्रोलिक मशीन लगाई है। बीस दिनों से लोगों को फैशन के हिसाब से हवाई चप्पलें मिल रही हैं। साथ ही एक अन्य युवक को भी रोजगार दिया है।
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दिल्ली और मुंबई में लगभग 12 वर्ष तक प्राइवेट कंपनियों में नौकरी के बाद लॉकडाउन में गांव लौटे इन दोनों युवाओं ने स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार की मिसाल पेश की है। उन्होंने गांव में ही हवाई चप्पल निर्माण की सोची और कुछ दिन पूर्व मैनवल हाइड्रोलिक मशीन खरीदकर बुढ़ना बाजार में किराए पर कमरा स्थापित की। मशीन का ट्रायल सफल होने के बाद बीते दो सप्ताह से नियमित रूप से चप्पलें बनाई जा रही हैं। अब, बुढ़ना में फुटवियर से जुड़ी प्रतिष्ठित कंपनियों की रबर सीट से हवाई चप्पल तैयार होती रहेंगी। रूपेश ने बताया कि कच्चा माल की नियमित उपलब्धता के लिए कंपनियों से संपर्क किया गया है। पांच सौ से अधिक चप्पल का कच्चा माल उपलब्ध है। मांगनुसार उचित दामों पर हवाई चप्पल उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। ग्राम प्रधान आरती देवी का कहना है कि युवाओं का गांव में स्वरोजगार शुरू करना अन्य के लिए प्रेरणा है। क्षेपं सदस्य रचना देवी, बीरेंद्र राणा, जितेंद्र नैथाणी, भीम सिंह, जयपाल सिंह ने युवाओं के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि उन्हें हरसंभव सहयोग किया जाएगा।
इनसेट
हर उम्र के लोगों के लिए बनेंगी चप्पल
रुद्रप्रयाग। युवाओं द्वारा लगाई गई मैनवल हाइड्रोलिक मशीन में तीन डाई लगी हैं। पहली डाई से एक वर्ष से 13 वर्ष तक के बच्चों के लिए, दूसरी डाई से 4 नंबर से 9 नंबर की पुरूष और तीसरी डाई से 3 नंबर से 9 नंबर तक महिलाओं की सिंपल और फैंसी हवाई चप्पल बनाई जा रही हैं।
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