केदारनाथ यात्रा तैयारियों के नाम पर रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर तीन वर्ष से सुधारीकरण के नाम पर लाखों रुपये स्वाह होने के बावजूद प्रभावित स्थानों पर स्थिति सुधरने के बजाय और खराब हुई है। कई जगहों पर भू-धंसाव से मार्ग खस्ताहाल बना हुआ है।
जून 2013 की आपदा में 76 किमी राजमार्ग नौला पानी से गौरीकुंड के बीच लगभग सात किमी पूर्ण रूप से ध्वस्त हो गया था। बीआरओ ने सड़क का पुनर्निर्माण कर दिसंबर 2014 में वाहन गौरीकुंड तक पहुंचाए।
कार्यदायी संस्था जब तक मार्ग के स्थायी मरम्मत का प्रयास करती, शासन स्तर पर इसे लोनिवि एनएच निर्माण खंड को हस्तांतरित कर दिया गया। विभाग की ओर से बीते दो वर्ष से सुधार के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।
सेमी, रामपुर और खाट गांव के नीचे भूधंसाव हो रहा है। चंद्रापुरी से कुंड के बीच सड़क संकरी होने के साथ ही कई जगहों पर खस्ताहाल भी है। हालात इस कदर हैं कि राजमार्ग पर कई किमी तक निकास नाली नहीं होने से बरसाती पानी सड़क पर जमा है।
पहाड़ी से धंस रहा 60 मीटर से अधिक हिस्सा
सोनप्रयाग-गौरीकुंड के बीच हाईवे पर दो स्थानों पर बड़े क्षेत्र में भू-धंसाव हो रहा है। सोनप्रयाग बाजार से करीब दो किमी आगे पहाड़ी पर कई मीटर ऊंचाई तक वायरक्रेट लगाई गई हैं। वहीं सड़क पर भी तारबंद पुस्ता लगा है।
इसके बावजूद पूरा क्षेत्र धंस रहा है। गौरीकुंड पार्किंग से एक किमी पहले पहाड़ी से हल्की बारिश में पत्थर व मलबा गिरने से राजमार्ग बंद हो रहा है। स्थिति यह है कि सोनप्रयाग-गौरीकुंड तक पांच किमी हाईवे की जिम्मेदारी डीडीएमए सिविल डिवीजन गुप्तकाशी को सौंपी गई हैं। विभागीय ईई केएस नेगी ने बताया कि संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं।
बरसात में राजमार्ग पर यातायात कम से कम बाधित हो, इसके लिए संवेदनशील स्थानों पर मशीेनें तैनात की गई हैं। चारधाम प्रोजेक्ट के तहत हाईवे पर स्थायी सुधारीकरण व चौड़ीकरण की टेंडर प्रक्रिया चल रही है। निर्माण कार्य संभवत: अक्तूबर माह से शुरू होगा।
- प्रवीन कुमार, ईई एनएच, निर्माण खंड रुद्रप्रयाग