फोटोग्राफी से मंदिर का डिजिटल रिकॉर्ड भी किया जा रहा है तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रप्रयाग। बसुकेदार स्थित 12वीं से 13वीं सदी के मंदिर समूह का जीर्णोद्धार शुरू हो गया है। पुरातत्व विभाग की टीम की ओर से मंदिर के खंभों और छतों की मरम्मत कर, मंदिर की नक्काशीदार दीवारों, मूर्तियों और पत्थरों को मौसम, काई और प्रदूषण से बचाने के लिए विशेष रासायनिक लेप लगाया जा रहा है। साथ ही फोटोग्राफी के माध्यम से मंदिर का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है।
जिले के सुदूरवर्ती गांव बसुकेदार में 12वीं से 13वीं सदी में यह ऐतिहासिक मंदिर समूह है। इस मंदिर समूह में छोटे-बड़े चौदह मंदिर हैं। मुख्य मंदिर शिवालय है जिसके गर्भगृह में शिवलिंग स्थापित है। यह मंदिर नागर शैली में निर्मित है। गर्भगृह के मंडप परिसर में गणेश की प्रतिमा स्थापित है। साथ ही नागदेवता के तांबे से बनी आकृतियां भी यहां हैं। मगर अनदेखी के कारण कई वर्षों से जीर्णशीर्ण स्थिति में पहुंच गया था। अब पुरातत्व विभाग की ओर से मंदिर के उपचार और जीर्णोद्धार का कार्य किया जा रहा है। पुरातत्व विभाग के संरक्षण सहायक अनिल नेगी ने बताया कि पहले केमिकल से मंदिर प्रांगण और दीवारों पर लगी काई को साफ किया जा रहा है। इसके बाद फिर कैमिकल लेप लगाया जाएगा ताकि मंदिर बारिश से भी सुरक्षित रहे। वहीं विनीत गिरी मंदिर की फोटोग्राफी कर डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर रहे हैं।