वर्ष 2012 की ऊखीमठ और 2013 की केदारनाथ आपदा के अलावा पहले से बरसात से प्रभावित गांवों के पुनर्वास को लेकर मांग हो रही है। इधर, जिला प्रशासन ने वर्ष 2014 अक्तूबर में अगस्त्यमुनि, ऊखीमठ और जखोली तहसील के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का सर्वेक्षण कर 23 गांवों के 472 परिवारों को पुनर्वास के लिए चिह्नित किया था।
इसकी रिपोर्ट भेजे डेढ़ वर्ष बीतने के बाद इन गांवों के बारे में अलग-अलग बिंदुओं को शामिल कर जानकारी मांगी गई है। प्रशासन ने प्रारंभिक सर्वेक्षण में अति संवेदनशील की श्रेणी में जखोली तहसील के पांजणा गांव के 148 परिवार, ऊखीमठ तहसील के सेमी तल्ला गांव के 40, कविल्ठा के 7, जाल तल्ला के 2 और कुणजेठी के 4 परिवारों को रखा है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग के माध्यम से रिपोर्ट इस सप्ताह शासन को भेज दी जाएगी।
इन गांवों का होना है विस्थापन
पांजणा, जैली, मूसाढूंग (सुनाई तोक), कालीमठ, कुणजेठी, जागतल्ला, बलसुण्डी, बीरोंदेवल खालीतोक, सेमी तल्ली दैड़ा, सिल्लाबमणगांव, चमराड़ा, गिरिया, कविल्ठा, ऊखीमठ, नागजई (जाख तोक), टेमरिया वल्ला, दिलमी, टाटलग्गा फेगू, डमार, मलाऊं, कुंडा दानकोट (धोकाणी तोक) और छांतीखाल।
विस्थापन के लिए चिह्नित गांवों को श्रेणीबद्ध तरीके से पुनर्वास किया जाएगा। पहले चरण में अति संवेदनशील गांवों को शामिल किया जाएगा। शासन की ओर से मांगी गई जानकारी के तहत जिले से प्रारंभिक चरण में जखोली व ऊखीमठ के पांच गांवों के बारे में जानकारी भेजी गई है।- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग