सूचनपंतनगर। मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय की ओर से आयोजित तीन दिनी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का समापन हो गया। बृहस्पतिवार को समापन कार्यक्रम में पूर्व निदेशक एवं कुलपति केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा अनुसंधान केंद्र मुंबई के डॉ. एसडी त्रिपाठी ने अंतर स्थलीय जलीय स्रोतों के स्वास्थ्य प्रबंधन के लिए की गई सिफारिशोें को भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। कहा कि इन्हें लागू करने से प्राकृतिक संपदा का लंबे समय तक ह्रास नहीं होगा।
कुलपति डॉ. तेज प्रताप ने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि इस सम्मेलन के आयोजन में मत्स्य विज्ञान महाविद्यालय तथा केंद्रीय अंतरस्थलीय अनुसंधान संस्थान बैरकपुर की विशेष भूमिका है। पूर्व सहायक महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद डॉ. वीवी सुगुनन, केंद्रीय मात्स्यिकी शिक्षा अनुसंधान केंद्र मुंबई के डॉ. दिलीप कुमार एवं अध्यक्ष जलीय पर्यावरण एवं स्वास्थ्य प्रबंधन समिति कनाडा डॉ. एम मुनावर ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।
डॉ. एपी शर्मा ने कहा कि सम्मेलन की संस्तुतियों को सभी नीति निर्धारकों को भेजा जाएगा। इससे जलीय पर्यावरण संरक्षण में सहयोग मिलेगा। सम्मेलन की संस्तुतियों को पंतनगर-बैरकपुर डिक्लेयरेशन के रुप में जाना जाएगा और आगे प्रसारित किया जाएगा।
सम्मेलन में इन संस्तुतियों पर लगी मुहर
पंतनगर। सम्मेलन की संस्तुतियों में जलाशयों, नदियों, झीलों इत्यादि का जन समुदाय के लिए समगतिशील उपयोग करना, नदियों के बहाव को नियंत्रित रखना, शीत जल में मछलियों के प्रग्रहण हेतु नियम लागू करना, प्रदूषण कारक पदार्थों का प्राकृतिक जल स्रोतों में प्रवेश बंद करना पर मुहर लगी।
इसके अलावा शिक्षण अनुसंधान एवं सरकारी संस्थानों को मिलजुल कर प्राकृतिक जल स्रोतों एवं जीव-जंतुओं का संरक्षण करना, जन चेतना हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना, वेट लाइन के सदुपयोग के लिए समय-समय पर प्रबंधन करना, जलीय गुणवत्ता एवं जीव जंतुओं का मापन करना, मात्सयिकी नीतियों का पुनर्वालोकन करना आदि शामिल हैं।
पांच वैज्ञानिकों को मिला स्वर्ण पदक
पंतनगर। सम्मेलन के समापन अवसर पर भारतीय अंतरस्थलीय मात्स्यिकी समिति के पांच वैज्ञानिकों डॉ. बीके बेहरा, डॉ. बीजू, डॉ. जनमेजय, डॉ. हिमांशु एवं डॉ. ध्रुव ज्योति को स्वर्ण पदक प्रदान किया गया। पांच सत्रों के लिए नौ वैज्ञानिकों डॉ. रोसिथ, डॉ. कैनसियल जनसन, डॉ. एसएन दत्ता, डॉ. बोनिका पंत, डॉ. सीमागु बोहरा, डॉ. विभा लोहनी, डॉ. राजिंदर कौर, डॉ. वंदना दास व डॉ. स्वागत घोष को शोध पत्रों की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुति के लिए भी सम्मानित किया गया।