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दहशत में रौडू गांव के 21 परिवार

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ऊखीमठ-मंडल-गोपेश्वर राष्ट्रीय राजमार्ग रौडू में हो रहा आए दिन बंद। शुक्रवार को बंद राजमार्ग शनिवार शाम साढ़े पांच बजे खुला। - फोटो : Amar Ujala
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घर के पीछे मलबे का ढेर लगा है। पानी रिसकर कमरों तक पहुंच गया है। खेत-खलियान पूरी तरह से बर्बाद हो गए हैं। मेरे पति परिवार की सुरक्षा और बच्चों की पढ़ाई के लिए ऊखीमठ बाजार में कमरे की व्यवस्था के लिए गए हैं।
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सड़क से गिर रहे पत्थर और मलबे के खतरे ने गांव छोड़ने के लिए विवश कर दिया है.. ये शब्द रौडू गांव निवासी विमला देवी के हैं। कारण गांव के ऊपर से निर्माणाधीन मस्तूरा-दिलमी-करोखी मोटर मार्ग से गिर रहे पत्थर व मलबा है। इससे गांव की पेयजल लाइन, पैदल रास्ता और खेत-खलियान क्षतिग्रस्त हो गए हैं।

रौडू गांव के घरों व गोशालाओं से लेकर खेतों में मलबे के ढेर देखे जा सकते हैं। 21 परिवारों वाला यह गांव कई दिनों से दहशत में जी रहा है। गांव के खेमानंद भट्ट व मायाराम भट्ट बताते हैं निर्माणाधीन मस्तूरा-दिलमी-करोखी मार्ग गांव के लिए खतरा बनकर रह गया है। बुधवार को परिवार व मवेशियों सहित घर को छोड़कर गांव के दूसरे छोर पर शरण ले ली थी। वहां भी बरसाती पानी घुसने से भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। अब कहां जाएं। दस दिनों से दिनरात एक समान कट रहे हैं। यह स्थिति अन्य परिवारों की भी है।
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अमित भट्ट, जेपी भट्ट और सुरेशी देवी का कहना है कि सड़क निर्माण से पहले ग्रामीणों एवं लोनिवि के बीच समझौता हुआ था कि अगर गांव के किसी भी आवासीय भवन या गोशाला को क्षति पहुंचेगी तो विभाग प्रभावित परिवरों की स्वयं व्यवस्था करेगा। बारिश से गांव की तरफ बह रहे मलबा व पत्थर गांव का अस्तित्व ही खतरे में आ गया है। लोग सुरक्षा के लिए पलायन के लिए मजबूर हो रहे हैं। 

बच्चों को भी स्कूल भेजने पर भी डर लग रहा है। बावजूद विभागीय अधिकारी अब तक मौके पर नहीं पहुंचे हैं। इधर, विभागीय जेई अशोक मैखुरी ने प्रभावित क्षेत्र के लिए कार्ययोजना तैयार करने की बात कही है।
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