तल्लानागपुर के चोपता में राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान छह वर्ष से किराए के सात कमरों पर चल रहा है। संस्थान का भवन निर्माण फॉरेस्ट एक्ट के कारण अधर में लटका है, जिसका खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ रहा है।
वर्ष 2014 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा चोपता में राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान खोला गया था। संस्थान का संचालन चोपता बाजार में किराए के भवन पर सिविल इंजीनियरिंग ट्रेड के साथ शुरू हुआ। यहां निर्धारित 26 सीटों पर छात्र-छात्राओं ने प्रवेश भी लिया। साथ ही तकनीक शिक्षा विभाग द्वारा चोपता बाजार से लगभग एक किमी आगे कुंडा-दानकोट ग्राम पंचायत में संस्थान के भवन निर्माण के लिए दो हेक्टेयर भूमि का चयन किया गया। शासन स्तर पर भी भवन निर्माण के लिए चार करोड़ स्वीकृत किए गए। प्री-फ्रेब्रिकेटिंग भवन निर्माण की जिम्मेदारी यूपी निर्माण निगम को सौंपी गई। करीब डेढ़ करोड़ से कार्यदायी संस्था ने लोहे के पिलर से भवन के भूतल का ढांचा तैयार किया। तभी, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग ने यह कहकर रोक लगा दी कि भवन निर्माण के लिए चयनित दो हेक्टेयर भूमि संस्थान के नाम हस्तांतरित नहीं हुई है। भाजपा के सतेराखाल मंडल के अध्यक्ष गंभीर सिंह बिष्ट, जिपं सदस्य सुनीता देवी, क्षेपं सदस्य आरती, ग्राम प्रधान यशवर्द्धन रावत, बृज सिंह नेगी ने प्रदेश सरकार से चोपता में पॉलीटेक्निक का भवन निर्माण पूरा करने की मांग की है।
छह वर्ष से भवन निर्माण फॉरेस्ट के चलते अटका पड़ा है। वन विभाग क्षतिपूर्ति के लिए 8 हेक्टेयर भूमि मांग रहा है, जो पूरे क्षेत्र में कहीं नहीं मिल पा रही है। इस संबंध में विभाग व शासन से भी नियमित पत्राचार किया जा रहा है।
- तपन अरोड़ा, प्रधानाचार्य राजकीय पॉलीटेक्निक संस्थान, चोपता