हिंदी विषय के साथ देवभूमि उत्तराखंड की लोक बोली/भाषा गढ़वाली, कुमाऊंनी, जौनसारी व रवाईं की पढ़ाई भी कर सकेंगे। इन बोलियों में सृजित गीत, कविता, साहित्य, कहावतें, पखाणें और कहानियों को कक्षा 1 से 10 वीं तक हिंदी विषय के साथ पाठ्यक्रम में शामिल किया जा रहा है।
गढरत्न लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी का कहना है स्कूलों में लोक बोली को पढ़ाने का सरकार का निर्णय सराहनीय है। इससे बोलियों का वृहद स्तर पर प्रचार-प्रसार होगा। लोक कवि मुरली दीवान, सुधीर बर्तवाल, जगदंबा चमोला, ओपी सेमवाल का कहना है कि देर से ही सही, उत्तराखंड को उसकी सही पहचान दिलाने का काम किया जा रहा है। इस पहल से नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने में भी मदद मिलेगी।
डायट में तैयार हो रहा पाठ्यक्रम
डायट रुद्रप्रयाग में इन दिनों कक्षा 4, 7 और 9 के लिए पाठ्य वस्तु को अंतिम रूप दिया जा रहा है। प्राचार्य सहित 9 सदस्यीय टीम इसे अंतिम रूप देने में जुटी है। टीम द्वारा कक्षा 4 में गढ़वाली में रैबार कहानी, गढ़वाली पखाणें, लोक गीत व कविता और कुछ पहेलियां शामिल की गई हैं। कक्षा 7 में गढ़वाली में यात्रा वृतांत स्मरण के तौर पर देवरिया ताल को शामिल किया गया है। कक्षा 9 में लोक भाषा की कहानी रैबार और दो लोक कविताएं शामिल की गई हैं। लोक कवि तोता कृष्ण गैरोला, भजन सिंह (भजन), चंद्रकुंवर बर्तवाल की संक्षिप्त एक या दो लोक साहित्य में सृजित कविताओं को जूनियर कक्षाओं में शामिल किया जा सकता है।
डायट पौड़ी की ओर से कक्षा 6, 8 और 10 तथा डायट चमोली (गौचर) कक्षा 1, 3 और 5 के लिए गढ़वाली में पाठ्यवस्तु तैयार कर रहा है।
लोक भाषा/बोली को स्कूलों में पढ़ाने की पहल सराहनीय है। आगामी शिक्षण सत्र से इसकी पढ़ाई होनी है। एनसीईआरटी की ओर से हिंदी विषय में प्रत्येक लोक बोली की पाठ्य वस्त ुको दो पेज में मिलने हैं। हमारे यहां कक्षा 4, 7 और 9 के लिए सामग्री लगभग तैयार कर दी गई है।
-- सुधीर सिंह असवाल, प्राचार्य डायट रुद्रप्रयाग (रतूड़ा)