जिला मुख्यालय से लगे जयमंडी गांव निवासी देव सिंह बिष्ट की तीन संतानों में मझले मुकेश का जन्म वर्ष 1987 में हुआ। ढाई वर्ष की उम्र में वह बहुत बीमार हुआ और पोलियोग्रस्त हो गया। शारीरिक अक्षमता के बावजूद बचपन से ही वह मेहनती रहा। वह अपने माता-पिता पर कभी भी बोझ नहीं बना।
प्राथमिक की पढ़ाई ननिहाल कफोली (पौड़ी) से पूरी करने के बाद वह अपने घर लौट आया। वह आगे की पढ़ाई नहीं कर पाया। उसने स्वयं मेहनत कर आत्मनिर्भर होकर जीने की ठानी। इसके तहत रुद्रप्रयाग में कपड़े सिलने का काम सीखना शुरू किया। काम में मन नहीं लगा तो कुछ ही दिन में छोड़ दिया।
इसके बाद वह दो-तीन वर्षों तक घर में रहा। वर्ष 2003 में वह रुद्रप्रयाग में अपने चाचा के वर्कशाप में काम करने लगा। यहां वह वाहनों के सुधारने में कुछ ही दिनों में निपुण हो गया। भतीजे की कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए चाचा ने मुकेश को ही वर्कशाप की जिम्मेदारी सौंप दी। 12 वर्ष के सफर में मुकेश के हुनर का हर मोटर मालिक व चालक कायल है। वह वाहन का बड़ा सा बड़ा फाल्ट भी कुछ ही मिनटों में पकड़कर उसे ठीक कर देता है। वर्कशाप से वह प्रतिमाह 80 हजार से एक लाख रुपये के बीच कमाई कर रहा है। मुकेश एक बेटे के पिता भी हैं।
मुकेश का कहना है, मैंने बचपन से ही ठान ली थी कि मैं किसी पर बोझ नहीं बनूंगा। ऐसे लोगों के बारे में सुना था जिन्होंने शारीरिक अक्षमता के बावजूद समाज में नए मुकाम हासिल किए। मैं स्वयं आत्मनिभर बनना चाहता था। आज अपनी मेहनत से संतुष्ट हूं।
विकलांगता के बावजूद मुकेश का वर्कशाप का संचालन कर अन्य को रोजगार दे रहे हैं, यह गौरव की बात है। प्रशासनिक व विभागीय स्तर पर इस युवा के लिए जो भी मदद की जरूरत होगी, उसके लिए पूरे प्रयास किए जाएंगे। -- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग