गुलदार की दहशत के कारण रोजगार चौपट हो रहा है। महिलाएं, खेतीबाड़ी और घास के लिए समूह में जाने से भी डर रही हैं। गुलदार रास्ते में कब हमला कर दे इसका भय बना है। भरदार पट्टी के गांवों में शाम पांच बजे के बाद गांव में लोग अपने घरों में दुबक जाते हैं। यह कहना है बांसी गांव के जितेंद्र सिंह रावत का जो अपने साथियों के साथ रात के साढ़े 11 बजे तक गांव में गश्त कर रहे हैं।
जितेंद्र सिंह रावत बताते हैं कि आठ नवंबर को गांव में घास लेने गई एक महिला को गुलदार ने मार डाला था। जिस बांसी गांव में बीते अक्तूबर तक पंचायत चौक में अंधेरा होने तक चौपाल लगी रहती थी वहां एक माह से सुनसान पड़ा है। सभी शाम चार बजे तक घरों में कैद हो जाते हैं। ग्रामीण वासुदेव राणा, बीरेंद्र सिंह धनाई, वीर सिंह राणा और धर्म सिंह राणा ने बताया कि दैनिक मजदूरी वाले लोगों का रोजगार भी चौपट हो रहा है। गांव से जीआईसी सौंराखाल पढ़ने वाले बच्चों को छोड़ने के लिए भी लोग समूह में जा रहे हैं। स्थिति यह है कि गुलदार के डर के कारण श्रीनगर-चौरास-बांसी मार्ग पर दुपहिया वाहनों का आवागमन लगभग बंद हो चुका है। इधर, सतनी गांव में भी यही स्थिति है। यहां भी लोग शाम पांच बजे के बाद घरों में दुबक जाते हैं। पपडासू में भी गुलदार की धमक बनी है।
शिकारियों ने मचान किया तैयार
रुद्रप्रयाग। पपडासू गांव में शिकारी लखपत रावत और जॉय हुकिल ने गुलदार को ढेर करने के लिए अपने स्तर से तैयार कर दी है। उन्होंने घटनास्थल के समीप ही पेड़ पर मचान तैयार कर दिया है। शिकारी लखपत रावत ने बताया कि गुलदार अपने किए हुए शिकार पर दोबारा जरूर आता है। वह दिखाई दिया तो उसे ढेर कर दिया जाएगा।