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अब गांवों में मतदाताओं में नहीं दिखता मतदान का उत्साह

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देवभूमि उत्तराखंड में पांचवीं विधानसभा गठन के लिए बिगुल बज चुका है। इस बार रुद्रप्रयाग जिले से दो विस सीटों पर 1 लाख 92 हजार मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इन मतदाताओं में महिलाओं की संख्या अधिक है, लेकिन अब वोट के दिन गांवों में महिला मतदाताओं में वह उत्साह नजर नहीं आता है, जो पूर्व में होता था। अब गांवों में भी महिलाएं समूह में वोट देने के बजाय अपने समय के हिसाब से जाने लगी हैं।
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केदारघाटी के बडासू गांव की 100 वर्षीय जौसी देवी बताती हैं कि उन्होंने 1956 में पहला वोट दिया था। तब, वह गांव की 50/60 महिलाओं के साथ वोट देने गई थी। इसके बाद, बीते विस चुनाव तक अपने मताधिकार का प्रयोग करने वाली वृद्धा मतदाता ने बताया कि वोट का दिन उत्सव जैसा होता था। रांसी गांव की 80 वर्षीय पूर्व क्षेपं सदस्य जीवंती खोयाल का कहना है कि राज्य निर्माण के बाद सुविधाओं के लिए बढ़ते पलायन ने वोट के उत्सव को भी हाशिए पर ला दिया है। कुछ ही गांव रह गए हैं, जहां खेतीबाड़ी, पशुपालन का काम पहले जैसा होता है। अन्य गांवों में यह कार्य सीमित रह गया है, जिससे लोगों के पास समय की कमी नहीं है। ऐसे में अब, वह अपने हिसाब से वोट देने जाते हैं। केंद्रीय विवि श्रीनगर गढ़वाल के प्रो. डा. जयप्रकाश भट्ट बताते हैं कि पहले गांवों में ही पूरा जनजीवन होता था। लोगों के पास काम होते थे, इसलिए वह वोट के दिन, प्राथमिकता से अपने कार्यों को पूरा करने के बाद समूह के रूप में वोट देने जाते थे। यह एक सहभागिता का प्रमाण था। साथ ही लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी का एहसास भी।
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