फसल उत्पादन के लिए जनवरी में हुई बारिश को सबसे उपयोगी माना जाता है। इस वर्ष बीते माह सिर्फ 2.4 मिमी बारिश होने से खेती पर व्यापक असर पड़ने लगा है। जिले में कई स्थानों पर गेहूं और जौ की फसलें सूखे की चपेट में आ गई हैं। कुछ इलाकों में तो खेत सूख चुके हैं।
जनपद में 12420 हेक्टेयर भूमि (सिंचित/असिंचित) पर फसलें बोई गई हैं। 10350 हेक्टेयर भूमि पर गेहूं, 1250 हेक्टेयर पर जौ, 350 हेक्टेयर पर मसूर और 450 हेक्टेयर पर सरसौं बोई गई है। बारिश नहीं होने से ये फसलें 15 से 25 प्रतिशत तक सूखे की चपेट में आ चुकी हैं। जनवरी में नाममात्र की बारिश होने से बच्छणस्यूं, धनपुर, दशज्यूला-कांडई पट्टी के कई गांवों में गेहूं, जौ और सरसों जमा ही नही है। ऊंचाई व घाटी वाले नम क्षेत्रों में भी खेतों की आद्रता काफी कम होने से फसल वृद्धि नाममात्र है। आंकड़ों पर गौर करें तो चार वर्षों में इस वर्ष जनवरी में सबसे कम बारिश हई है।
कृषि पंडित मुरली सिंह चौधरी का कहना है कि फसलों को पहले ही जंगली जानवरों ने व्यापक रूप से क्षति पहुंचाई थी। रही-सही कसर बीते माह से हुए शुष्क मौसम ने पूरी कर दी है। गेहूं, जौ और सरसों की फसल के लिए 80 से 95 मिमी बारिश की जरूरत होती है। आने वाले 10 दिनों में भी बारिश नहीं होने पर आधी फसल सूखे की चपेट में आ सकती है।
कोट-
दिसबर में बारिश का बूंद तक नहीं गिरा। जनवरी में नाममात्र बारिश से फसलों को कोई लाभ नहीं मिला है। ऐसे में हालात गंभीर होते जा रहे हैं। जिले में 30 फीसदी फसलें बारिश के अभाव में प्रभावित हो चुकी है। - विजय देवराड़ी, मुख्य कृषि अधिकारी रुद्रप्रयाग