जखोली ब्लॉक की सीमांत ग्राम पंचायत भ्यूंता के स्यांरी गांव में एक ग्रामीण सुखदेव सिंह पंत ने उद्यानीकरण की नई मिसाल पेश की है। उनके बगीचे में न्यूजीलैंड की कीवी और ताइवान के आड़ू का उत्पादन हो रहा है। विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी पहाड़ी नारंगी का संरक्षण करने में भी वह जुटे हैं।
जिला मुख्यालय से लगभग 70 किमी दूर बसा स्यांरी गांव पलायन की मार झेल रहा है। 300 परिवारों वाले गांव में आज सिर्फ 30 परिवार रह रहे हैं। यहां अधिकांश खेती बंजर हो चुकी है। इसके बावजूद 55 वर्षीय सुखदेव पंत वर्ष 2012-13 से स्वयं के प्रयासों से गांव को नई पहचान देने में जुटे हैं। वे अपनी दो हेक्टेयर भूमि पर कीवी, आड़ू, नारंगी, माल्टा, संतरा, बारामासी कागजी, नाशपाती, अखरोट, खुमानी, सेब, अंजीर का वह उत्पादन कर रहे हैं। इन दिनों बगीचे में कीवी की 36 बेलें लकदक बनी हुई हैं, जिन पर करीब ढाई से तीन कुंतल फल लगे हुए हैं। नवंबर में यह फल पककर तैयार हो जाएगा। पंत द्वारा वर्ष 2012 में न्यूजीलैंड से ये बेल मंगाई गई थी।
पंत द्वारा 2014 में ताइवान से मंगाए गए लाल आड़ू के 50 पौधे भी फल देने लगे हैं। वे आयुर्वेद के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं। बगीचे में लेमनग्रास, सतावरी, बहेड़ा, आंवला, रोजबेरी की नर्सरी भी तैयार की जा रही है। काश्तकार पंत ने बताया कि विभाग द्वारा उन्हें सिर्फ दो पॉलीहाउस उपलब्ध कराए गए हैं। अन्य कोई सहयोग नहीं मिल रहा है। इधर, जिला उद्यान अधिकारी योगेंद्र सिंह चौधरी का कहना है कि प्रगतिशील काश्तकारों को विभागीय योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं।
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डेढ़ लाख पौधे हो रहे बर्बाद
रुद्रप्रयाग। पंत के दो पॉलीहाउस और बगीचे के अन्य हिस्से में नारंगी, माल्टा, संतरा, आंवला, बहेड़ा, कचनार, शीशम और कीवी के डेढ़ लाख पौधे मौजूद हैं, लेकिन खरीददार नहीं मिलने से वे बर्बाद हो रहे हैं। बताया कि उद्यान व कृषि विभाग को कई बार अवगत कराने पर भी सुध नहीं ली जा रही है।
स्यांरी गांव में काश्तकार सुखदेव पंत के बगीचे में ताइवान का लाल आडू का हो रहा उत्पादन।- फोटो : RUDRAPRYAG