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केदारनाथ को संवारने में निम की अहम भूमिका

Thu, 16 Jun 2016 10:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला रुद्रप्रयाग
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आपदा से बेहाल केदारनाथ को संवारने में नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) ने सबसे बड़ी भूमिका निभाई। पुनर्निर्माण के तहत ढाई वर्ष में रामबाड़ा से केदारनाथ तक छह फिट चौड़े सात किमी नये रास्ते का निर्माण करने के साथ लिनचोली को नए पड़ाव के रुप में विकसित करने में अहम योगदान दिया।
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16/17 जून 2013 की आपदा से बेहाल केदारनाथ को संवारने और वहां पुनर्निर्माण के लिए सरकार द्वारा मार्च 2014 में निम को जिम्मेदारी सौंपी गई। प्राचार्य कर्नल कोठियाल के नेतृत्व में दल रामबाड़ा पहुंचा। यहां सबसे पहले मंदाकिनी नदी के दूसरे किनारे से रास्ता बनाने का कार्य शुरू किया गया।

निम ने रामबाड़ा से धाम तक सवा दो वर्ष में 30 कार्य पूरे कर दिए हैं, जिसमें 65 दिन में नया रास्ता निर्माण कर धाम तक आवाजाही सुचारु की गई। वहीं केदारनाथ धाम में एमआई-26 हेलीपैड सहित तीन वैली ब्रिज का निर्माण भी शमिल है। बीते दो वर्षो में निम ने शीतकाल में भी 8 से 19 डिग्री मानइस पारे में पुननिर्माण कार्य जारी रखे।
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एक तरफ जहां धाम की सुरक्षा के लिए इटली और फिलीपींस की तकनीक से त्रिस्तरीय दीवारें बन रही हैं, वहीं अमेरिकी तकनीक से जीओ सेल की मदद से मंदिर से हेलीपैड तक चार सौ मीटर रास्ते का निर्माण भी किया गया। दूसरी तरफ उरेडा के साथ मिलकर धाम में दो सौ किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना निर्माण से लेकर मंदाकिनी व सरस्वती के संगम पर निर्मित स्नानघाट निम की बड़ी उपलब्धि हैं।

आधुनिक मशीनें भी पहुंचाई केदारनाथं
केदारनाथ पुनर्निर्माण के लिए निम ने शुरूआती समय में जहां कई मशीनें पैदल रास्ते से रामबाड़ा से लेकर केदारनाथ पहुंचाई। वहीं जनवरी 2015 में एमआई-26 से आधुनिक हाइड्रा सहित कई डंपर, ट्रक और वजन उठाने वाली भारी से भारी मशीनें धाम पहुंचाई। धाम में ही गैरेज बनाकर इन मशीनों को एसेंबल किया गया और पुनर्निर्माण कार्य को गति दी।
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