केदारनाथ की सुरक्षा पर फोकस
आपदा के बाद केदारनाथ धाम कुछ बदला नजर आ रहा है। इन तीन वर्षो में राज्य सरकार का मुख्य फोकस केदारनाथ पर ही रहा है। मंदिर की सुरक्षा के लिए जहां तकनीक की मदद से त्रिस्तरीय सुरक्षा दीवारें बन रही हैं, वहीं मंदाकिनी व सरस्वती नदी तटों को भी सुरक्षित किया जाना है।
आपदा में केदारनाथ धाम बुरी तरह से प्रभावित हो गया था। मंदिर को आंशिक क्षति पहुंची थी। केदारपुरी में व्यापक नुकसान हुआ था। मंदिर से लेकर चारों तरफ बिखरे मलबे और बोल्डरों के बीच राज्य सरकार तीन वर्ष में धाम को उसका स्वरूप लौटाने में काफी हद तक सफल हुई है।
कार्यदायी संस्था नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (निम) के कर्मियों और मजदूरों ने मशीनों की मदद से भारी बोल्डर हटाए हैं। मंदिर की सुरक्षा के लिए पीछे की तरफ से 400, 600 और 800 मीटर की दूरी पर गेबिन वॉल, रॉकनेट वॉल और आरसीसी वॉल बनाई जा रही है, जो अंतिम चरण में हैं।
इन तीन वर्षों में केदारनाथ में निम द्वारा एमआई-26 हेलीपैड, वीआईपी हेलीपैड, तीन वैली ब्रिज, रामबाड़ा से केदारनाथ तक पैदल मार्ग का निर्माण भी किया गया है। इस बीच एक हफ्ते से केदारनाथ में आपदा से जमा मलबे की सफाई का कार्य भी शुरू कर दिया गया है।
तीर्थ पुरोहितों के लिए बनाए जा रहे भवन
शासन द्वारा केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों के लिए 107 भवन धाम में बनाए जा रहे हैं। 15 से अधिक भवनों का कार्य 75 फीसदी हो चुका है। जबकि कुछ भवनों की बुनियाद पड़ चुकी है।
मंदिर को दुरुस्त कर रहा पुरातत्व विभाग
पुरातत्व विभाग द्वारा आपदा के बाद से चरणबद्ध तरीके से मंदिर के पश्चिम द्वार को ठीक करने के साथ ही दीवारों से छिटके पत्थरों के स्थान पर नए पत्थर लगाए जा चुके हैं। चारों तरफ सुरक्षा दीवार की बुनियाद डाली जा चुकी थी। जबकि इस सीजन में मंदिर की छत से हो रहे रिसाव को ठीक किया जा रहा है। केमिकल से मंदिर की बाहरी दीवारों की सफाई होनी है। विद्युत लाइन का कार्य भी होना है।
नदियां होगी चैनलाइज
मंदाकिनी व सरस्वती नदी को केदारनाथ में चैनलाइज किया जाएगा, जिससे भविष्य में किसी भी उफान से मंदिर व मंदिर परिसर को नुकसान न पहुंचे। इसके अलावा मंदिर की निचली तरफ से मंदाकिनी नदी पर ढाई सौ मीटर सुरक्षा दीवार का निर्माण भी किया जाना है।
पैदल पड़ावों की सुरक्षा भगवान भरोसे
आपदा में रामबाड़ा के तबाह होने के बाद, नदी के दूसरी तरफ से केदारनाथ के लिए रास्ता तैयार किया गया। इस रास्ते पर लिनचोली नए पड़ाव के रूप में विकसित किया गया। लेकिन पड़ाव की सुरक्षा को लेकर कोई कार्य नहीं किया गया। यहीं नहीं, पैदल मार्ग पर स्थिति जंगलचट्टी, भीमबली में भी सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं, जबकि इन पड़ावों के समीप से मंदाकिनी का उफान हर वर्ष जमीन काट रहा है, जिस कारण भू-धंसाव का खतरा बना है। संकरी घाटी और नदी का तेज बहाव होने से दोनों तरफ भूस्खलन हो रहा है। बावजूद अभी तक इन पड़ावों की सुरक्षा के लिए शासन स्तर पर कार्रवाई तो दूर, प्लान तक तैयार नहंी किया गया है।
केदारनाथ की सुरक्षा को लेकर शासन से मिले निर्देशों के तहत कार्य हो रहे हैं। आपदा के बाद इन तीन वर्षो में हालात काफी सामान्य हो चुके हैं। शेष कार्यों के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं। पैदल पड़ावों को लेकर शासन स्तर पर न कोई निर्देश मिले हैं और न ही कोई कार्ययोजना बनी है।
-- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग