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Rudraprayag News: नेटवर्क नहीं होने से शोपीस बने मोबाइल फोन

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बात करने के लिए ग्रामीणों को जाना पड़ता है दो सौ मीटर दूर
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गुप्तकाशी। कालीमठ घाटी के चिलौंड गांव के लोगों को मोबाइल पर बात करने के लिए घरों से दो सौ मीटर दूर ऊंचाई वाली जगह पर जाना पड़ता है। साथ ही गांव सड़क से भी वंचित है, जिससे ग्रामीणों को पांच किमी पैदल चलना पड़ता है।
चिलौंड गांव के 80 परिवार सड़क, संचार, बैंक, अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। स्नातक की पढ़ाई कर रही गांव की मीनाक्षी व अंकुश राणा का कहना है कि गांव में इंटरनेट तो दूर फोन पर बात करना भी मुश्किल है। ऐसे में कॉलेज में ही प्रोजेक्ट तैयार करने होते हैं। वहीं, दसवीं की छात्रा साक्षी व खुशी का कहना है कि उनके लिए ऑनलाइन पढ़ाई के बारे में कोई जानकारी नहीं है। संचार सेवा नहीं होने से उनके पास फोन तक नहीं है। सातवीं की छात्रा सृष्टि का कहना है कि नेटवर्क नहीं होने के कारण कुछ ऑनलाइन सर्च भी नहीं कर पाते हैं।
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चिलौंड के छात्र नौवीं की पढ़ाई के लिए राजकीय हाईस्कूल कोट मल्ला और इंटर की पढ़ाई के लिए जीआईसी कोटमा की दौड़ लगाते हैं, जिसके लिए उन्हें दो तरफा पांच से नौ किमी पैदल दौड़ लगानी पड़ रही है। 21वीं सदी के तीसरे दशक में भी चिलौंड गांव को आज तक मोबाइल सेवा नहीं मिल पाई है।
गांव के मोहन सिंह राणा बताते हैं कि गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं आता है। ग्रामीण राजेंद्र सिंह राणा, आशीष सिंह का कहना है कि सुविधाओं के अभाव में गांव से प्रतिवर्ष कई परिवार पलायन कर रहे हैं। बीते एक दशक में गांव से 40 परिवार पलायन कर चुके हैं।

गांव को यातायात सुविधा से जोड़ने के लिए 2006 में गुप्तकाशी-कालीमठ-कोटमा-चौमासी मोटर मार्ग से जाल बैंड से दो किमी सड़क स्वीकृत की गई थी। पीएमजीएसवाई के तहत सड़क निर्माण के लिए 33.66 लाख स्वीकृत किए थे, लेकिन वनभूमि के चलते सड़क 12 वर्ष तक फाइलों में ही दबी रही। लोनिवि ऊखीमठ डिवीजन ने 2019 से सड़क निर्माण की कार्रवाई शुरू की, लेकिन 100 मीटर कटान पर ही पूर्व में स्वीकृत धनराशि खर्च हो गई। यह 100 मीटर हिस्सा भी आपदा की भेंट चढ़ गया था।
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चिलौंड गांव के लिए दो किमी सड़क व 36 मीटर स्पान पुल के निर्माण के लिए 4.5 करोड़ का प्रस्ताव शासन को छह माह पूर्व भेजा जा चुका है। प्रस्ताव, विचाराधीन है।
- मनोज भट्ट, अधिशासी अभियंता लोक निर्माण विभाग ऊखीमठ डिवीजन
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