मद्महेश्वर घाटी के रांसी गांव में मनणी माई की पांच दिवसीय लोकजात का विधिविधान से शुभारंभ हो गया है। आराध्य की डोली ने सुबह 6 बजे मनणी बुग्याल के लिए प्रस्थान किया। कोरोनाकाल के कारण दो तरफा 64 किमी लंबी इस यात्रा में इस बार पुजारी समेत छह श्रद्धालु शामिल हैं।
सोमवार को रांसी गांव में सुबह 5 बजे मनणी माई की विशेष पूजा-अर्चना शुरू की गई। डोली का शृंगार कर पुजारी ने तंत्र-मंत्र और गायत्री शक्तियों का आह्वान कर डोली में समाहित किया। साथ ही यात्रा की कुशलता के लिए पांचनाम देवताओं की पूजा-अर्चना भी की गई। राकेश्वरी मंदिर समिति के अध्यक्ष जगत सिंह पंवार, सामाजिक कार्यकर्ता शिव सिंह रावत ने बताया कि कोविड-19 के नियमों का पालन करते हुए यात्रा में सिर्फ छह श्रद्धालु शामिल हैं। यात्रा रांसी से प्रस्थान करते हुए जात, सनियारा, पट्णी होते हुए अपने पहले रात्रि प्रवास के लिए थौलधार पहुंची। वहां पर देर शाम को पुजारी द्वारा आराध्य की विशेष पूजा की गई। 20 जुलाई को यात्रा शिलासमुद्र में रात्रि प्रवास करेगी और 21 जुलाई की सुबह अपने धाम मनणा बुग्याल पहुंचेगी। यहां देवी की पूजा-अर्चना की जाएगी। मनणी माई को भेड़ पालकों की आराध्य देवी माना जाता है। यात्रा में पंडित ईश्वरी प्रसाद भट्ट, शिव सिंह रावत, बलवीर पंवार, अभिषेक नेगी, रोहित नेगी और अंकित राणा शामिल हैं।