23 मई 2004 में चोपता में लोक गायक नरेंद्र सिंह नेगी की उपस्थिति में ओम प्रकाश सेमवाल ने साहित्यक संस्था कलश की स्थापना की। अपने 12 वर्ष के सफर में संस्था गढ़वाली बोली के प्रचार-प्रसार और संरक्षण के लिए निरंतर काम कर रही है। उत्तराखंड के लोक साहित्यकारों के दिशा-निर्देशन में संस्था अब तक 202 लोक कवि सम्मेलन कर चुकी है।
संस्था ने रुद्रप्रयाग, पौड़ी, चमोली, उत्तरकाशी, देहरादून सहित फरिदाबाद और कुरुक्षेत्र में अपनी प्रस्तुतियों से गढ़वाली बोली को बढ़ावा देने का काम किया है। संस्था के साथ प्रख्यात लोक कवि मुरली दीवान व जगदंबा चमोला सहित सुधीर बर्तवाल, डा. शैलेंद्र मैठाणी, अनूप नेगी, अश्विनी गौड, तेजपाल निर्मोही जैसे युवा कवि जुड़े हैं।
गढ़वाली बोली को कलश संस्था जिस तरह बढ़ावा देने का काम कर रही है, वह सराहनीय है। गढ़-कुमाऊंनी बोली को राजभाषा के रूप में दर्जा देने के लिए चल रहे लोक भाषा आंदोलन के लिए इस तरह के प्रयास जरूरी हैं। - विमल नेगी गढ़वाली साहित्यकार
यह जरूरी है कि लोक भाषा का प्रचार-प्रसार हो और उसे संरक्षण प्राप्त हो। लोक बोली व साहित्य के प्रति युवा पीढ़ी भी आगे आ रही है, वह सुखद है।
-- नंदकिशोर हटवाल, लोक साहित्यकार
लोक भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के लिए कलश जैसी संस्थाओं द्वारा किए जा रहे प्रसासों को प्रोत्साहित करने के साथ सहयोग की जरूरत भी है।
-- प्रो. डीआर पुरोहित, पूर्व निदेशक लोक कला एवं निस्पादन केंद्र, एचएनबीकेविवि श्रीनगर गढ़वाल