केदारनाथ में तीर्थ पुरोहितों के लिए मकान बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
प्रदेश सरकार 113 तीर्थ पुरोहितों को मकान बनाकर देगी। कार्यदायी संस्था नेहरू पर्वतारोहण संस्थान की ओर से धाम में तैयार ब्लाक, रेत, बजरी से मकानों का निर्माण किया जा रहा है।
आपदा के बाद से पुनर्निर्माण के दौर से गुजर रहे केदारनाथ धाम में दूसरे चरण के कार्य जोरों पर हो रहे हैं। मंदाकिनी व सरस्वती पर स्नान घाट के अलावा मंदिर के पीछे सुरक्षा दीवारों का कार्य दूसरे चरण में प्रवेश कर चुका है। वहीं निम ने मंदिर से करीब सौ मीटर पहले अलग-अलग चयनित स्थानों पर तीर्थ पुरोहितों की पूर्व के मकान व नाप जमीन के हिसाब से मकानों का निर्माण कर रही है। चार मकानों का निर्माण कार्य दो से तीन फीट तक हो गया है। निम ने बताया कि कई मकान दो से तीन मंजिला भी बनाए जाएंगे।
16/17 जून 2013 की आपदा में केदारनाथ में डेढ़ सौ से अधिक मकान सैलाब में बह गए थे। जबकि दो सौ के करीब जर्जर हो गए थे। इनमें तीर्थ पुरोहितों के अलावा 46 सरकारी भवन भी थे। विशेषज्ञों ने स्थलीय सर्वे के बाद सभी जर्जर मकानों को तोड़ने की राय दी थी।
केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य कर रहे निम ने सभी 46 सरकारी जर्जर भवनों को बीते वर्ष ही तोड़ दिया था। जबकि तीर्थ पुरोहितों को सरकार धाम में उनकी भूमि व मकान के हिसाब से ही भवन बनाकर दे रही है। केदारनाथ के तीर्थ पुरोहितों को सरकार मुआवजा भी बांट चुकी है।
पुनर्निर्माण के दूसरे चरण में केदारनाथ में 113 तीर्थ पुरोहितों के लिए भवनों का निर्माण होना है। तीर्थ पुरोहित के पास जितनी भूमि थी या जितना बड़ा/कमरे का मकान था, उसी के आधार पर भवन बनाए जा रहे हैं। अन्य 33 तीर्थ पुरोहितों ने भी अपनी सहमति दी है।
- डा. राघव लंगर, डीएम रुद्रप्रयाग