केदारघाटी में स्वास्थ्य सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। यहां अस्पताल जहां रेफर सेंटर बने हुए हैं। जरूरी सुविधाएं न होने से मरीजों को 40 से 76 किमी की दूरी तय कर रुद्रप्रयाग जाना पड़ता है। मंदाकिनी नदी के दोनों तरफ बसा अधिकांश क्षेत्र केदारघाटी कहलाता है।
यहां बुखार की दवा से लेकर अन्य स्वास्थ्य सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। वर्ष 2012 में ऊखीमठ और 2013 में केदारनाथ आपदा के बाद केदारघाटी के गुप्तकाशी और अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ऊखीमठ को सुविधाओं से लैस करने के लिए शासन स्तर पर घोषणाएं भी की गईं। यहां तक कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, पूर्व कैबिनेट मंत्री डा. हरक सिंह रावत व सुरेंद्र सिंह नेगी ने क्षेत्र दौरे के दौरान गुप्तकाशी अस्पताल का उच्चीकरण कर विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की बात कही थी।
खून सहित अन्य जरूरी जांचों के साथ एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड की सुविधा मुहैया कराने का दावा किया गया, लेकिन आज तक एक भी आश्वासन फलीभूत नहीं हो पाया। स्थानीय दिनेश बगवाड़ी, विनोद शुक्ला, श्रीनिवास पोश्ती, राकेश गोस्वामी आदि का कहना है कि केदारघाटी के कस्बों और गांवों में चोटिल व बीमार को किसी भी प्रकार की प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के लिए रुद्रप्रयाग ले जाना पड़ता है। शासन-प्रशासन व विभाग को कई बार अवगत कराने पर भी सुध नहीं ली जा रही है।
जिला मुख्यालय सहित क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की बेहतरी के लिए लगातार शासन से पत्राचार किया जा रहा है। प्रयास हो रहे हैं कि केदारघाटी में एक्स-रे व अन्य जांचों की व्यवस्था गुप्तकाशी व ऊखीमठ में की जाए।
-- डा. आरपी बडोनी
सीएमओ रुद्रप्रयाग