चोपता। पारंपरिक मोटे अनाजों को वैज्ञानिक तकनीक से जोड़कर वैश्विक बाजारों तक पहुंचाने के लिए जीआईसी जवाहर नगर, मयकोटी में हुई कार्यशाला के तीसरे दिन छात्र-छात्राओं और महिला समूहों को मोटे अनाजों के प्रसंस्करण व मूल्य संवर्धन की जानकारी दी गई। कहा गया कि कार्यशाला का उद्देश्य मंडुवा और झंगोरा जैसे उत्तराखंड के पारंपरिक मोटे अनाजों को आधुनिक तकनीक, बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण, आकर्षक पैकेजिंग और प्रभावी ब्रांडिंग से जोड़ना है।
प्रतिभागियों को बताया गया कि मोटे अनाज न केवल पोषण से भरपूर हैं बल्कि ये प्रदेश की समृद्ध कृषि, सांस्कृतिक परंपरा और स्थानीय जीवनशैली का भी अभिन्न हिस्सा हैं। . सचिन नेगी ने कहा कि स्थानीय संसाधनों पर आधारित कौशल प्रशिक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का सबसे प्रभावी माध्यम है। आकर्षक पैकेजिंग से बाजार में उतारा जाए, तो स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार मिल सकता है। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक भगवान सिंह रावत, धीरेंद्र सिंह बर्त्वाल, अनूप नेगी, पूनम, जगदंबा चमोला, मातबर सिंह नेगी, धर्मानंद चमोला, मंजरी नेगी आदि मौजूद रहे।