वर्ष 2006 में सिलगढ़ क्षेत्र की 12 ग्राम पंचायतों की 14 हजार की आबादी के के लिए तैला-सिलगढ़ पेयजल लाइन स्वीकृत की गई। 6 करोड़ 23 लाख की योजना पर पेयजल निगम ने वर्ष 2009-10 में कार्य शुरू किया। पहले फेज में कुछ किमी लाइन बिछी। दूसरे फेज में वर्ष 2011-12 स्टोर टैंक बनाए गए। लाइन का काम पूरा नहीं हो पाया। जबकि योजना पर 6 करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। स्रोत अब भी क्षतिग्रस्त है।
वर्ष 2005-06 में भरदार पट्टी के 12 ग्राम पंचायतों की करीब 20 हजार की आबादी के लिए रौंठिया-जवाड़ी पेयजल योजना स्वीकृत की गई। 1294 लाख रुपये खर्च के बाद भी 10 वर्ष से योजना पूरी नहीं हो पाई है। पेयजल निगम ने 11 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट शासन को भेजा है।
उत्तराखंड पेयजल निगम की उदासीनता जखोली विकासखंड की 24 ग्राम पंचायतों की 40 हजार आबादी पर भारी पड़ रही है। यहां गांवों में लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरह रहे हैं। घरों में एक-एक सदस्य को पानी जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो तड़के से आधी रात तक दूरस्थ स्रोतों की दौड़ लगा रहे हैं।
करोड़ों खर्च के बाद भी निगम की तैला-सिलगढ़ व रौंठिया पेयजल योजनाएं अधर में हैं। एक दशक पहले स्वीकृत योजनाओं के निर्माण के लिए प्राप्त धनराशि खर्च के बाद भी योजनाओं का कार्य आधा-अधूरा है। सिलगढ़ विकास संघर्ष समिति के अध्यक्ष वीर सिंह कंडारी का कहना है शासन- प्रशासन व निगम की लापरवाही का खामियाजा ग्रामीण भुगत रहे हैं। पानी के अभाव में चाका, फलाटी और बुडोली में स्थिति सबसे बुरी है। इधर सौंरा-जवाड़ी जिला पंचायत सदस्य आशा डिमरी का कहना है कि पूर्व सीएम हरीश रावत के के निर्देश के बाद भी रौंठिया-जवाड़ी पेयजल योजना का काम पूरा नहीं हो पाया है। बता दें कि जलनिगम की लस्तर-सुमाड़ी, तल्ला नागपुर सहित 35 छोटी-बड़ी पेयजल योजनाएं लंबे समय से पूरा होने की राह देख रही हैं।
रौंठिया-जवाड़ी पेयजल योजना को पूरा करने के लिए 11 करोड़ का रिवाइज इस्टीमेट भेजा गया है। स्वीकृति के बाद ही काम पूरा हो पाएगा। तैला-सिलगढ़ योजना का कार्य अंतिम चरण में है, मई माह तक पूरा होने की उम्मीद है।- एसके बरनवाल, अधिशासी अभियंता पेयजल निगम रुद्रप्रयाग