जखोली ब्लॉक के शीशों गांव में सैकड़ों नाली भूमि पानी के अभाव में सूखे की कगार पर पहुंच चुकी हैं। लस्तर नदी से बंदरतोली-शीशों सिंचाई नहर लंबे समय से क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। विभागीय अधिकारियों को समस्या से अवगत कराने पर भी सुध नहीं ली जा रही है।
लॉकडाउन में गांवों में पहुंच रहे ग्रामीण खेती व उद्यानिकी के लिए उत्साहित हो रहे हैं, लेकिन शीशों गांव में ग्रामीण काश्तकारों की पारंपरिक खेती चौपट हो रही है। पिछले एक वर्ष से भी अधिक समय से सिंचाई नहर कई जगहों पर क्षतिग्रस्त पड़ी है, जिस कारण खेतों में पानी नहीं पहुंच रहा है। स्थिति यह है कि जिन खेतों में बीते वर्षों तक इन दिनों धान की रोपाई हुआ करती थी। वे, इस समय सूखे पड़े हैं। काश्तकार महिपाल सिंह नेगी, सत्ये सिंह जगवाण, गिरीश बुटोला आदि का कहना है कि सिंचाई विभाग को क्षतिग्रस्त नहर के बारे में अवगत कराने पर भी कार्रवाई नहीं हो रही है। दूसरी तरफ अगस्त्यमुनि ब्लॉक के गिंवाला गांव की सिंचाई नहर अंधेरगढ़ी-धारतोलियूं मोटर मार्ग के मलबे की भेंट चढ़ गई है। ग्रामीण देवी प्रसाद, प्रेमा देवी, करण सिंह, पूजा मलासी आदि का कहना है कि एक वर्ष से नहर सूखी पड़ी है। सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी समस्या निस्तारण के बजाय सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं।