अष्टमुखी भगवान भैरवनाथ की देवरा यात्रा ओंकारेश्वर मंदिर में पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गई। भैरवनाथ की देवरा ने आठ दिन तक क्षेत्र भ्रमण कर अपने गूठ गांवों के भक्तों की कुशलक्षेम पूछी।
शनिवार को भैरवनाथ की डोली अपने मूल मंदिर पहुंची, यहां भक्तों ने देवता का भव्य स्वागत किया।
आचार्य घनानंद मैठाणी की अगुवाई में आचार्य विश्वमोहन जमलोकी, सत्यप्रसाद सेमवाल, यशोधर मैठाणी, देवेशानंद, विनोद व मगनानंद भट्ट, रमेश चंद्र सेमवाल सहित ऊखीमठ और कविल्ठा गांव के हक-हकूकधारी 21 पुजारियों ने हवन कुंड में आहुतियां दीं। इस दौरान कई देवी-देवता अपने पश्वाओं पर अवतरित हुए।
दोपहर को वैदिक पूजा-अर्चना और अनुष्ठान के साथ पूर्णाहुति के बाद भैरवनाथ के निषाणों को धवल पर्वत के क्षेत्रपालधार में स्थापित किया गया। 300 वर्ष बाद आयोजित इस यात्रा का आयोजन डंगवाडी, ब्रहामणखोली, बंजपाणी, भटवाड़ी, संसारी, पूसीघट, जाखणी, किमाणा, पैंज, पठाली, डुंगर, सेमला गांव के ग्रामीणों ने किया। आराध्य देवता ने सेमी, गुप्तकाशी, साकरी, देवर, नाला, नारायणकोटी, भैंसारी गांव का भ्रमण किया।
समापन अनुष्ठान में केदारनाथ की पूर्व विधायक आशा नौटियाल, जिला पंचायत सदस्य संगीता नेगी, अध्यक्ष ज्योतिषाचार्य दीपक कुंवर, संयोजक लक्ष्मी प्रसाद भट्ट, संरक्षक मोहन सिंह रावत, बॉबी रावत, भगवती शैव, पुष्कर सिंह रावत और सुनील सिद्ध सहित कई गांवों के ग्रामीण मौजूद थे।