चार पट्टियों की आराध्य देवी मां त्रिपुरा बाला सुंदरी (हरियाली देवी) की कांठा जात संपन्न हो गई। रातभर चली यह पारंपरिक धार्मिक यात्रा सुबह कांठा पहुंची।
शुक्रवार धनतेरस पर्व पर रजत प्रतिमा के साथ अपने मायके हरियाली कांठा के लिए रवाना हुई हरियाली देवी की डोली शनिवार सुबह अपने अंतिम पड़ाव कनखल पहुंची।
यहां हरियाली देवी के मायके पक्ष पाबो के ग्रामीणों ने देवी की अगुवानी की। हरियाली देवी के कांठा पहुंचते ही मां के जयकारों से पूरी धनपुर व रानीगढ़ की घाटियां गूंजने लगी। इसके बाद कांठा मंदिर में देवी की पूजा-अर्चना कर हवन कुंड में आहुतियां डाली गई।
करीब आधा घंटे तक अपने मायके में बीताने के बाद डोली ने अपने ससुराल जसोली मंदिर के लिए प्रस्तान किया। जसोली मंदिर पहुंचते ही भक्तों ने डोली के दर्शन कर आशीष लिया।