जखोली विकासखंड के पपडासू गांव में गुलदार ने एक महिला को अपना शिकार बना दिया। महिला का शव गांव से तीन किमी दूर क्षत-विक्षत हालत में मिला। गुलदार के हमले की एक माह में यह तीसरी घटना है। शिकारी जॉय हुकिल और लखपत सिंह रावत मौके पर पहुंच गए हैं। क्षेत्र की शिकारियों व विभागीय कर्मियों द्वारा रेकी की जा रही है।
बीते शुक्रवार को पपडासू गांव निवासी कौशल्या देवी (55) पत्नी जगत सिंह घास लेने जंगल गई थी, लेकिन देर शाम तक जब वह घर नहीं लौटीं, तो परिजनों ने ग्रामीणों की मदद से खोजबीन की। लेकिन कहीं कोई पता नहीं लगा। शनिवार को तड़के से पुन: महिला की ढूंढ खोज की गई, तो गांव से लगभग तीन किमी दूर महिला का क्षतविक्षत शव मिला। गुलदार द्वारा कमर से ऊपर का पूरा हिस्सा खा रखा था, सिर्फ ढांचा मात्र रह गया था। सूचना पर रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ वैभव कुमार, एसडीओ एमएस सिरोही व खांकरा रेंज के रेंजर समेत प्रशासन, राजस्व विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे। शव को कब्जे में लेते हुए राजस्व उप निरीक्षक मौके पर पहुंचे।
डीएफओ वैभव कुमार ने बताया घटनास्थल की स्थिति से प्रथम दृष्टया प्रतीत हो रहा है कि यह वही गुलदार है, जिसके द्वारा बीते माह भी दो लोगों को मारा गया था। शिकारी जॉय हुकिल और लखपत सिंह रावत मौके पर पहुंच चुके हैं। पूरे क्षेत्र की शिकारियों व विभागीय कर्मियों द्वारा रेकी की जा रही है। साथ ही यहां दो-तीन स्थानों पर ट्रैप कैमरा लगाए जा रहे हैं। बताया कि प्रभावित परिवार को तीस प्रतिशत मुआवजा राशि तत्काल प्रदान कर दी जाएगी, जबकि शेष, राशि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट के बाद दी जाएगी।
खतरे के साये में जी रहे हैं भरदार क्षेत्र के लोग
रुद्रप्रयाग। सामाजिक कार्यकर्ता मोहित डिमरी ने बताया कि एक माह में तीन लोगों को गुलदार द्वारा अपना निवाला बनाया गया है। बीते एक माह से पूरा भरदार क्षेत्र भय के साये में जी रहा है। अगर, गुलदार को जल्द खत्म नहीं किया गया, तो अन्य घटनाएं भी हो सकती हैं। बीते माह छह नवंबर को गुलदार ने सतनी गांव में एक अधेड़ और आठ नवंबर को बांसी गांव में एक महिला को अपना शिकार बनाया था। तब, ग्रामीणों की मांग पर वन विभाग द्वारा गुलदार को नरभक्षी घोषित करते हुए मारने के लिए शिकारियों को तैनात किया गया था, लेकिन इसके बाद गुलदार का पूरे क्षेत्र में कोई पता नहीं लग पाया। घटना के बाद गुलदार के पुन: सक्रिय होने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे लोग भयभीत हैं।