शुक्रवार को प्रात: 6 बजे से गिरीया गांव में भगवान की चल विग्रह उत्सव डोली की विशेष पूजा शुरू हो गई थी। पुजारी वागेश लिंग ने आरती उतार दी। इसके बाद प्रात: 7 बजे डोली ने पंचकेदार गद्दी स्थल के लिए प्रस्थान किया।
कुमाऊं रेजीमेंट की बैंड धुनों और स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ भगवान मद्महेश्वर की डोली दोपहर बाद एक बजे देवदर्शनी-मंगोलचारी पहुंची। यहां पर केदारनाथ के रावल ने डोली की अगुवानी करते हुए विशेष पूजा की और डोली को सोने का छत्र पहनाया। बाद में डोली सैकड़ों भक्तों के साथ ब्राह्मणखोली और डंगवाड़ी गांव पहुंची।
यहां से आगे बढ़ते हुए उत्सव डोली दो बजे ओंकारेश्वर मंदिर पहुंची। गद्दी स्थल में मंदिर के पुजारी वागेश लिंग, शिव शंकर लिंग, एमटी गंगाधर लिंग सहित वेदपाठी विश्वमोहन जमलोकी, नवीन मैठाणी, यशोधर मैठाणी, आशाराम नौटियाल ने वेद मंत्रोच्चार के बीच चल विग्रह उत्सव डोली की मूर्तियों को उतार कर पुष्परथ पर विराजमान किया।
ओंकारेश्वर मंदिर की सात परिक्रमा के बाद अभिषेक पूजा कर मूर्तियों को गर्भगृह में विराजमान किया गया। इस मौके पर विधायक शैलारानी रावत, पूर्व विधायक आशा नौटियाल, मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह, कार्यधिकारी अनिल शर्मा, डोली प्रभारी युद्धवीर पुष्पवाण, राजकुमार नौटियाल आदि मौजूद थे।