चंडीगढ़ के पीजी में तीन लड़कियों की जिंदा जलने की घटना रुद्रपुर में भी दोहराई जा सकती है। शहर में चल रहे कई पीजी में अग्निशमन से संबंधित सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।
इन पर न तो प्रशासन की नजर है और न ही फायर अधिकारी ध्यान दे रहे हैं। ऐसे में ये किसी भी समय मुसीबत का कारण बन सकते हैं। लापरवाही की हद इस तरह है कि किसी भी पीजी संचालक ने अब तक फायर एनओसी लेने की जहमत तक नहीं उठाई है।
अमर उजाला टीम ने शहर के 12 से अधिक पीजी में आग से निपटने की व्यवस्थाओं का परखा। यहां पर सभी पीजी बगैर पंजीकरण के चल रहे हैं। इन पीजी में न तो फायर सिस्टम लगे है और न ही यहां कोई ट्रेंड स्टाफ काम कर रहा है। विषम परिस्थितियों में सुरक्षा का जिम्मा भगवान भरोसे है।
फायर ब्रिगेड के एफएसओ रामधारी यादव ने बताया शहर में चल रहे पीजी में कार्रवाई समय-समय पर की जाती है। इसके बाद भी किसी पीजी संचालक ने फायर एनओसी नहीं ली है। पीजी में रह रही लड़कियों और लड़कों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी।
होटल और अस्पताल में भगवान भरोसे
रुद्रपुर। पीजी के साथ ही शहर के कई निजी अस्पताल और होटल भी भगवान भरोसे चल रहे हैं। इसे फायर बिग्रेड की नाकामी ही कहेंगे कि नोटिस देने के बाद भी इन अस्पताल और होटल स्वामियों ने एनओसी लेना तो दूर अग्निशमन सुरक्षा के उपकरण तक नहीं लगाए। गर्मी का सीजन शुरू होते ही इन स्थानों पर सबसे ज्यादा आग की घटनाओं का खतरा बना रहता है।
दो माह में 20 को थमाया नोटिस
रुद्रपुर। फायर एनओसी नहीं लेने पर दमकल विभाग दो माह में 20 लोगों को नोटिस दे चुका है। इनमें अस्पताल, होटलों के साथ ही कई फैक्ट्री शामिल हैं। पिछले दो वर्षों पर नजर डालें तो 2018 में आग लगने की 239 और 2019 में आग लगने की 228 वारदातें हुई। दमकल विभाग की कड़ी मशक्कतों के कई बड़े हादसे को होने से टाला गया।
पीजी संचालकों को कई बार एनओसी लेने के लिए कहा गया है। इसके खिलाफ अभियान भी चलाया जा रहा है। एनओसी नहीं लेने वाले दर्जनों होटल, अस्पतालों पर कार्रवाई की जा चुकी है। पीजी संचालकों के मनमानी पर जल्द शिकंजा कसा जाएगा। वंश यादव, सीएफओ।