आपदा प्रभावित जिले में आने वाले समय में चायपत्ती की काश्तकारों की आर्थिकी में बड़ी भूमिका होगी। उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड की ओर से जिले के जखोली और अगस्त्यमुनि में नर्सरी में 14 लाख आर्थोडॉक्स ब्लैक टी और ग्रीन-टी की पत्ती की पौधों को तैयार किया जा रहा है। बोर्ड ने इन पौधों को जिले में वृहद स्तर पर रोपित कर चाय उत्पादन की योजना तैयार की है।
जंगली जानवरों के कारण खेती से विमुख हो रहे काश्तकारों को चायपत्ती के उत्पादन को लेकर प्रदेश सरकार के प्रयास धरातल पर नजर आने लगे हैं। जिले के जखोली में दो वर्ष पूर्व चायपत्ती की नर्सरी शुरू कर दी गई।
यहां आने वाले तीन वर्षों में 60 हेक्टेयर भूमि पर चायपत्ती उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। वर्ष 2018 से चायपत्ती बनाने की प्रक्रिया के तहत चोपड़ा, पुजार और ललूड़ी गांव में चाय बगीचे विकसित हो रहे हैं।
अगस्त्यमुनि ब्लाक में 100 हेक्टेयर भूमि पर चायपत्ती उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। भणज गांव में चाय की नर्सरी भी शुरू की जा चुकी है, यहां 8 लाख चायपत्ती की पौधे उगाई जाएंगी। इसके अलावा चाय बागान के लिए कर्णसिल, कंडारा और क्यूंजा ग्राम पंचायत के चयनित स्थानों को लेकर भी सर्वे प्रक्रिया चल रही है।
काश्तकार से लीज पर ली जाएगी भूमि
उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड की ओर से जखोली और अगस्त्यमुनि ब्लाक में करीब तीन काश्तकारों से चाय बगीचों के लिए 7 वर्ष के लिए भूमि लीज पर ली जा रही है। जिन काश्तकारों की भूमि है, उनके परिवार के एक सदस्य को प्रतिदिन 202 रुपये के हिसाब से रोजगार दिया जाएगा। चायपत्ती पौधारोपण के लिए अन्य ग्रामीणों को भी शामिल किया जाएगा।
कोट
रुद्रप्रयाग जिले में 100 हेक्टेयर क्षेत्र में चायपत्ती उत्पादन की योजना है। प्रारंभिक स्तर पर जखोली और अगस्त्यमुनि में बीते वर्ष ऑथोडॉक्स ब्लैक टी और ग्रीन टी पौध की नर्सरी लगा दी गई है। इन क्षेत्रों में चाय बगीचों को विकसित करने के लिए, काश्तकारों से भूमि लीज पर ली जा रही है। - अनिल खोलिया, नोडल अधिकारी, उत्तराखंड चार्य बोर्ड, अल्मोड़ा।