पंचकेदार में द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम को पांचवें धाम के रूप में विकसित करने और नंदा राजजात की तर्ज पर धाम की यात्रा को भव्य बनाने की सीएम हरीश रावत की घोषणा दो वर्ष बाद भी पूरी नहीं हो पाई। धाम में बिजली, संचार, शौचालय तक की सुविधा नहीं है। द्वितीय केदार मद्महेश्वर धाम शासन-प्रशासन की अनदेखी का दंश झेल रहा है।
रांसी से 18 किमी की पैदल दूरी तय कर धाम पहुंचा जाता है, लेकिन पूरे पैदल मार्ग पर गौंडार तक ही दो-तीन स्थानों पर पानी की सुविधा है। धाम में जरूरी सुविधाएं भी गायब हैं। एक ओर जहां प्रदेश सरकार ऊखीमठ ब्लाक को खुले में शौच से मुक्त कर चुकी है, वहीं मद्महेश्वर में शौचालय की व्यवस्था नहीं है।
यहां ठहरने के लिए भी गिनती के छप्पर हैं, जिसमें हक-हकूकधारियों के अलावा मंदिर के कर्मचारी रहते हैं। वर्ष 2015-16 में मद्महेश्वर मेले में ऊखीमठ पहुंचे सीएम हरीश रावत ने धाम को पांचवें धाम के रूप में विकसित कर महीनेभर में जीओ जारी करने की घोषणा की थी, लेकिन आज तक इस दिशा में कोई कार्य नहीं हो पाया है।
यहीं नहीं उन्होंने द्वितीय केदार की यात्रा को राजजात की तर्ज पर विकसित करने का दावा भी किया था, जो हवाई साबित हुई। सुविधाओं के अभाव में वर्ष 2015 में जहां 25 सौ यात्री पहुंचे थे, वहीं 2016 में 2061 श्रद्धालु पहुंच पाए। बावजूद शासन स्तर पर धाम को लेकर न तो कोई योजना बन पाई और न ही पुरानी घोषणाएं पूरी हो रही हैं।
प्राचीन मठ-मंदिरों की भी नहीं सुध
जिले में नारायणकोटी, बसुकेदार, फेगू, फलासी सहित कई प्राचीन मंदिर समूह हैं, जो विशेष महत्व रखते हैं। लेकिन ये धार्मिक स्थल आज तक तीर्थाटन का हिस्सा नहीं बन पाए हैं। कोटेश्वर, रुच्छ महादेव, अगस्त्य महाराज, पुजार गांव वासुदेव मंदिर भी श्रद्धालुओं की नजरों से ओझल हैं। वहीं, रमणीक स्थलों से भी पर्यटक अंजान हैं।