उत्तराखंड के 13 डेस्टिनेशन में शामिल चिरबटिया में नेचर फेस्टिवल का दूसरा दिन बर्ड वाचिंग व ट्रेकिंग के नाम रहा। देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे 40 से अधिक पक्षी विशेषज्ञों ने माना कि चिरबटिया पक्षियों का पसंदीदा स्थल बन रहा है। यहां चीर फीजेंट समेत पक्षियों की 170 प्रजातियों का अध्ययन किया गया, जो बड़े भू-भाग में प्रवास करती आ रही हैं।
शनिवार को फेस्टिवल के दूसरे दिन के कार्यक्रमों का शुभारंभ रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ वैभव कुमार सिंह ने किया। पूर्वाह्न 11 बजे दिल्ली, मुंबई, देहरादून, कोटद्वार, रुद्रप्रयाग से पहुंचे 40 पक्षी विशेषज्ञों का दल चिरबटिया से रेई के लिए रवाना हुआ। लगभग 8 किमी के ट्रेकिंग के दौरान पक्षी विशेषज्ञ यशपाल सिंह नेगी, राजीव बिष्ट व दुष्यंत ने बताया कि इस क्षेत्र में चीर फीजेंट (इस पक्षी के नाम से ही चिरबटिया नाम पड़ा है) सबसे अधिक है। मयूरवंशी यह पक्षी अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा यहां माउंटेन हॉक, इगल, स्टेपी इगल, हिमालयन गिद्ध, यूरीशन ग्रीफॉन, ब्लू व्हिस्टलिंग, ग्रीन डोव, मैना, फैल्कन, हॉर्नबिल, वुडपेकर, ग्रीन पिजन, रेड हेडेड बल्चर और ब्रॉडबिल सहित 170 पक्षी प्रजातियां हैं, जो यहां प्रवास कर रही हैं। ये पक्षी, सर्दियों में निचले क्षेत्रों की तरफ भी प्रवास करते हैं। पक्षी विशेषज्ञ यशपाल सिंह नेगी के अनुसार बर्ड वाचिंग प्रकृति को जानने व समझने का सबसे बेहतर माध्यम है। कहा कि बर्ड वाचिंग प्रकृति प्रेम को बढ़ावा देने के साथ पर्यटन का बेहतर माध्यम बन रहा है।
25 सदस्यीय दल ट्रेकिंग पर हुआ रवाना
नेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन सुबह 10 बजे चिरबटिया से इंडिया हाइक्स ग्रुप व हिमालयन ट्राइव ग्रुप के 30 लोगों के साथ ही कुछ स्थानीय भी चिरबटिया-रेई ट्रेकिंग रूट पर ट्रेकिंग के लिए रवाना हुए। लगभग 8 किमी ट्रेकिंग रूट पर इन ट्रेकर ने प्रकृति के सौंदर्य को देखा। यहां प्राकृतिक रेई झील के समीप ही कैंपिंग की गई है। दोपहर बाद 20 से अधिक ट्रेकर लौट आए। जबकि 25 लोगों के द्वारा वहां पर रात्रि प्रवास किया जाएगा।
शिकारी रावत व हुकिल ने साझा किए अनुभव
नेचर फेस्टिवल में पहुंचे प्रसिद्ध शिकारी लखपत सिंह रावत व जॉय हुकिल ने अपने अनुभव साझा किए। बताया कि जंगलों में बढ़ रहे मानवीय हस्तक्षेप व कम होते भोजन के कारण गुलदार व अन्य वन्य जीव बस्तियों की तरफ अपना रुख कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि बीते कई वर्षों से उत्तराखंड में गुलदार की संख्या में इजाफा हुआ है, जिस कारण इनमें भोजन व आवास के लिए संघर्ष बढ़ रहा है। बताया कि वन क्षेत्र में एक किमी के दायरे में कम से कम 5 से 8 गुलदार निवास कर रहे हैं। उन्होंने वन्य जीवों के आवासीय क्षेत्रों में हस्तक्षेप पर अंकुश लगाने के लिए ठोस नीति पर जोर दिया।
रंगारंग कार्यक्रमों की रही धूम
नेचर फेस्टिवल की पहली सांस्कृतिक संध्या देवभूमि एक्सल ग्रुप व शोध बैंड रुद्रप्रयाग के कलाकारों के नाम रही। भगवान नृसिंह देवता की आराधना के साथ शुरू कार्यक्रम में देवभूमि एक्सल ग्रुप का पांडव नृत्य खास रहा। इस दौरान कलाकारों ने महाभारत पर आधारित घटनाओं का गायन व नृत्य के माध्यम से मंचन किया। वहीं, शोध बैंड के अनिरुद्ध चमोला, अनूप और अन्य कलाकारों द्वारा प्रस्तुत गढ़वाली, कुमाऊंनी व जौनसारी गीत-नृत्य की प्रस्तुतियों पर चिरबटिया, लुठियाग, पालाकुराली आदि गांवों से पहुंचे ग्रामीण देर रात तक झूमते रहे।
आज होगी 21 किमी लंबी हॉफ मैराथन
नेचर फेस्टिवल के समापन पर रविवार को 21 किमी हॉफ मैराथन का आयोजन किया जाएगा। पुरुष व महिला वर्ग में अलग-अलग आयु वर्ग में 3 किमी से लेकर 21 किमी हॉफ मैराथन आयोजित होगी। प्रतियोगिता के सभी वर्गों में लगभग एक हजार प्रतिभागी प्रतिभाग करेंगे। जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य विभाग, जलसंस्थान, पर्यटन व अन्य विभागों को व्यवस्था के लिए जरूरी निर्देश दिए हैं।
चिरबटिया नेचर फेस्टिवल के दूसरे दिन बर्ड वाचिंग व ट्रेकिंग के लिए दल रवाना होते हुए।- फोटो : RUDRAPRYAG