शक्तिपीठ कालीमठ, आपदा के बाद इस वर्ष शारदीय नवरात्र में लौटी रौनक।
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आपदा के तीन वर्ष बाद शारदीय नवरात्र में शक्तिपीठ कालीमठ मंदिर में रौनक लौट आई है। सरस्वती नदी पर पुल बनने के बाद जहां मंदिर में देवी भक्त बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। रुद्रप्रयाग से 50 किमी दूर कालीमठ मां काली के शक्तिपीठों में एक है। जून 2013 की आपदा में सरस्वती नदी के उफान से मंदिर तक पहुंचने वाला पुल बह गया था।
ऐसे में बीते दो वर्षों तक मंदिर में भक्त बमुश्किल से पहुंच रहे थे। इससे यहां की रौनक गायब हो गई थी, लेकिन तीन माह पूर्व लोक निर्माण विभाग द्वारा स्टील गार्डर पुल का निर्माण किए जाने के बाद से शक्तिपीठ में आपदा से पूर्व जैसी चहल-पहल दिखने लगी है। सड़क से लेकर मंदिर तक भक्तों की भीड़ देख यहां के व्यापारियों की खुशी उनके चेहरों से साफ झलक रही है।
केदार सिंह राणा बताते हैं कि आपदा के बाद पहली बार इन नवरात्र में मंदिर में इतनी अधिक संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पुजारी दीपक गौड़ ने बताया कि प्रात: सात से दोपहर बाद चार बजे तक श्रद्धालु मंदिर में पूजा-अर्चना के लिए पहुंच रहे हैं। आपदा के बाद जो परिस्थितियां पैदा हुई थीं, वे अब दूर होने लगी हैं। मंदिर के मठापति अव्वल सिंह राणा, ग्राम प्रधान गीता देवी, कुलदीप राणा आदि स्थानीय लोगों का कहना है कि कालीमठ मंदिर में उमडने वाला उल्लास व उत्साह अब नजर आने लगा है।
इधर, शारदीय नवरात्र के अष्टमी को मंदिर में देवी की विशेष पूजा की गई। रविवार को महानवमी पर कन्याओं का पूजन होगा। इस मौके पर मां के तीनों स्वरूप की विशेष पूजा भी की जाएगी। पंडित दीपक गौड़ ने बताया कि प्रात: से ही मंदिर में पूजा-अर्चना शुरू हो जाएगी। इसके बाद देवी पाठ होगा। समिति के कर्मचारी बीएस रावत ने बताया कि प्रतिदिन मंदिर में ढाई से तीन सौ श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।