गोष्ठी का उद्घाटन करते हुए बतौर मुख्य अतिथि उत्तराखंड चाय विकास बोर्ड के उपाध्यक्ष देवेंद्र झिक्वांण ने कहा कि काश्तकारों को समय-समय पर अपने खेतों की मिट्टी की जांच करानी चाहिए। न्याय पंचायत स्तर पर तैनात कृषि विभाग के कर्मियों से काश्तकार अपने खेतों की मृदा का परीक्षण कराने के बाद ही फसलों को बोएं।
उन्होंने जैविक खाद के उपयोग पर पर भी जोर दिया। मुख्य विकास अधिकारी सुनील कुमार ने कहा कि काश्तकार को उसकी फसल का सही दाम मिले इसके लिए जागरूक होना जरूरी है। मुख्य कृषि अधिकारी विजय देवराड़ी ने काश्तकारों को विभागीय योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जैविक खेती और जैविक खाद से होने वाले लाभ के बारे में भी बताया।
देवराड़ी ने कहा कि राष्ट्रीय संपोषणीय कृषि कार्यक्रम के तहत मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम है। कहा कि अगले दो वर्ष में जिले के प्रत्येक काश्तकार को मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध करा दिए जाएंगे। गोष्ठी में कृषि एवं भूमि संरक्षण अधिकारी एसएस वर्मा, नगर पालिका सभासद पंकज बुटोला, पूर्व जिला उद्यान अधिकारी भागवत बिष्ट, ब्लाक प्रभारी एसएस बिष्ट, अजय टम्टा, विनोद डिमरी, मुरली सिंह चौधरी आदि मौजूद थे।