इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हरीश रावत को 17 सूत्री मांगों का ज्ञापन भेजा। ज्ञापन में समिति ने सेवानिवृत्त मुख्य सचिव राकेश शर्मा का हस्तक्षेप बंद करने, पुनर्निर्माण में जुटे निम को जनपद से बाहर करने और जाड़े के सीजन में केदारनाथ में काम पर रोक लगाने की मांग भी की है।
मंगलवार को केदारघाटी आपदा पीड़ित संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीणों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। समिति अध्यक्ष गंगाधर नौटियाल ने कहा कि केदारनाथ पुनर्निर्माण के नाम पर केदारघाटी की जनता से छलावा किया जा रहा है। केदारनाथ में करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन क्षेत्र के आपदा प्रभावितों की सुध नहीं ली जा रही है। उन्होंने केदारनाथ को सड़क मार्ग से जोड़ने, मंदिर की सुरक्षा, केदारनाथ में सुरक्षित मकानों पर छेड़ख़ानी बंद करने, केदारपुरी से मलबा हटाकर रास्तों की व्यवस्था करने, वैलीब्रिज से मंदिर तक 30 फीट रास्ता और मंदिर के चारों तरफ 15 फीट रास्ता बनाने की मांग की।
उपाध्यक्ष राजाराम सेमवाल व महामंत्री विपिन सेमवाल ने केदारनाथ के लिए यात्रा में संचालित अंधाधुंध हवाई सेवाओं पर रोक लगानी की मांग की। उन्होंने तीर्थपुरोहितों को एक-एक लाख रुपये मुआवजा और राहत कार्य में पंचायतों की भूमिका निश्चित करने की बात भी कही। वक्ताओं ने सरकार से सोनप्रयाग से केदारनाथ तक पूर्व से रोजगार कर रहे स्थानीय लोगों को अक्तूबर माह तक पट्टे देने की बात भी कही गई। बाद में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को 17 सूत्री मांगों का ज्ञापन भी भेजा गया। इस अवसर पर टैक्सी यूनियन के अध्यक्ष राय सिंह राणा, अनिल स्वामी, शेर सिंह राणा, किशन बगवाड़ी, कुबेर पोश्ती सहित बड़ी संख्या में केदारघाटी के लोग शामिल थे।