जिला सभागार में विभागीय अधिकारियों की बैठक में नेगी ने कहा कि मैदा लकड़ी, अमेस, थुनेर, लेमन ग्रास, कुटकी, अतीश, आंवला, हैड़ा, बहेड़ा, बड़ी इलायची की बाजार में बहुत मांग है। ऐसे में विभागीय स्तर पर इसकी खेती के लिए काश्तकारों को प्रेरित किया जाना चाहिए।
उन्होंने वन पंचायतों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए अधिकारियों से सुझाव भी मांगे। कहा कि वन पंचायतों को मजबूत कर स्वयं सहायता समूह के माध्यम से कई रोजगार सृजित किए जा सकते हैं। रुद्रप्रयाग वन प्रभाग के डीएफओ राजीव धीमान ने जिले में वन पंचायतों की रूपरेखा पर चर्चा की। कहा कि जागरूकता से ही वन पंचायतों को मजबूत किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि सीमांकन नहीं होने से वन पंचायतों को लेकर कई प्रकार की दिक्कतें पैदा हो रही हैं, जिन्हें दूर करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। धनाभाव में भी इस दिशा में कारगर कदम नहीं उठ पा रहे हैं। बैठक में एडीएम राहुल कुमार गोयल, सीडीओ सुनील कुमार, एसडीएम देवमूर्ति यादव, उत्तम सिंह चौहान, तहसीलदार सुनील राज, एमएल भेंतवाल सहित विभागीय अधिकारी मौजूद थे।