वेतन और भत्तों की मांग को लेकर उत्तराखंड पेयजल निगम अधिकारी/कर्मचारियों का कार्य बहिष्कार का असर दिखने लगा है। जिले में 41 पेयजल योजनाओं का निर्माण व मरम्मत कार्य 14 दिन से ठप हैं। इसके साथ ही एक सौ से अधिक गांवों में पेयजल सप्लाई पर भी असर पड़ा है।
मौसम की बेरुखी से पहले ही रुद्रप्रयाग जनपद की 45 फीसदी आबादी गंभीर पेयजल संकट से जूझ रही है। वहीं पेयजल निगम कर्मियों की हड़ताल ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। जिले में जखोली और अगस्त्यमुनि ब्लाक के 50 से अधिक ग्राम पंचायतों की 30 हजार आबादी के लिए बनाई जा रही जवाड़ी-रौंठिया पेयजल योजना व तैला-सिलगढ़ व तल्ला नागपुर पपिंग योजना का निर्माण ठप है। इसके अलावा, निगम कर्मियों की हड़ताल से छोटी-बड़ी 35 अन्य पेयजल योजनाओं का निर्माण बंद होने के साथ ही 16 योजनाओं की देखरेख नहीं हो रही है। इससे 40 से अधिक गांवों की पेयजल सप्लाई पर सीधा असर पड़ा है। जनप्रतिनिधियों ने शासन-प्रशासन ने निगम कर्मियों की मांगों पर त्वरित कार्रवाई कर हड़ताल समाप्त करने की मांग की है।
ठेकेदारों का तीन करोड़ भुगतान अटका
रुद्रप्रयाग। पेयजल निगम कर्मियों की हड़ताल का असर ठेकेदारों पर भी पड़ रहा है। निर्माणाधीन योजनाओं का कार्य करा रहे ठेकेदारों को तीन करोड़ से अधिक का भुगतान इस माह में होना था, लेकिन एक रुपया भुगतान नहीं हुआ है।
तीन माह से वेतन व भत्तों का भुगतान नहीं होने से मजबूरी में हड़ताल का निर्णय लिया गया है। ऐसे में करोड़ों की योजनाओं का निर्माण व देखरेख प्रभावित हो रहा है। - एसके बरनवाल, ईई उत्तराखंड पेयजल निगम, रुद्रप्रयाग