रुद्रपुर। बैगुल जलाशय में केमिकलयुक्त पानी पहुंचने से हजारों की तादाद में मछलियों के मरने के मामले में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से लिए गए पानी के पांच सैंपल में से दो फेल हो गए हैं। इसके बाद बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने मुख्यालय को रिपोर्ट भेजकर सिडकुल सितारगंज में संचालित हो रहे जिंदल ट्रीटमेंट प्लांट और एक फैक्टरी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की है। माना जा रहा है कि प्रदूषण बोर्ड इस मामले में पर्यावरण क्षतिपूर्ति लेने की कार्यवाही कर सकता है।
दरअसल सितारगंज में स्थित बैगुल जलाशय में कई छोटे-बड़े नदी नालों का पानी पहुंचता है। बीते नवंबर में सिडकुल से आने वाले नाले से केमिकलयुक्त पानी के जलाशय में पहुंचने से बड़ी संख्या में मछलियां मरनी शुरू हो गई थीं। इसके साथ ही जलीय वनस्पति भी प्रभावित हो रही थी। वहीं, मछलियों के मरने से जलाशय का ठेका लेने वाली फर्म को नुकसान पहुंच रहा था। इसकी शिकायत फर्म की ओर से प्रदूषण बोर्ड से भी की गई थी। बीते 13 नवंबर के अंक में अमर उजाला ने ‘प्रदूषित पानी बैगुल जलाशय में मछलियों के लिए बन रहा है घातक’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इस खबर का प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संज्ञान लेते हुए अधिकारियों ने 14 नवंबर को सिडकुल सितारगंज पहुंचकर सीईटीपी से तीन और दो फैक्टरियों से पानी के सैंपल लिए थे। पानी के नमूनों को जांच के लिए केंद्र सरकार की दिल्ली स्थित सर्टिफाइड लैब को भेजा गया था।
प्रदूषण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी अनुराग नेगी ने बताया कि सीईटीपी के तीन में से दो नमूने सही पाए गए हैं। प्लांट से बाहर छोड़े जाने वाले पानी का सैंपल फेल हुआ है। इसे अलावा गुजरात अंबुजा फैक्टरी से सीईटीपी को भेजे जाने वाला पानी का नमूना भी तय मानकों में खरा नहीं उतर सका है। सैंपल फेल होने के बाद अब जिंदल ट्रीटमेंट प्लांट और गुजरात अंबुजा फैक्टरी पर कार्रवाई की संस्तुति के लिए रिपोर्ट मुख्यालय भेजी गई है। मुख्यालय के निर्देशों पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।