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वासुकीताल में कई वर्ष बाद खिला नीला कमल

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केदारनाथ से आठ किमी ऊपर वासुकीताल क्षेत्र में खिले इस बार नीलकमल। - फोटो : RUDRAPRYAG
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केदारनाथ धाम से आठ किमी ऊपर वासुकीताल में वर्षों बाद नीलकमल के फूल खिले हैं। नजारा ऐसा है कि मानो धरती ने नीली चादर ओढ़ ली है।
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केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर के नेतृत्व में टीम प्रभाग के ऊंचाई वाले क्षेत्रों का भ्रमण कर रही है। केदारनाथ में ब्रह्मवाटिका में भृंगराज व ब्रह्मकमल की सैकड़ों पौध सुरक्षित हैं। कई पौधों पर पुष्प खिलने वाले हैं। वहीं, केदारनाथ से आठ किमी ऊपर वासुकीताल क्षेत्र नीलकमल पुष्प से सरोबार है। पग-पग पर नीले फूल प्रकृति का शृंगार कर रहे हैं। वासुकीताल कुंड से लेकर करीब तीन किमी क्षेत्र में असंख्य नीलकमल खिले हुए हैं।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि वर्षों बाद यह फूल क्षेत्र में दिखाई दिया है। बता दें कि हिमालय क्षेत्र में चार प्रकार के कमल के फूल मिलते हैं। इनमें ब्रह्मकमल, नीलकमल, फेन कमल और कस्तूरा कमल शामिल हैं। कोरोनाकाल में पर्यटकों की गतिविधियां शून्य होने के कारण मध्य हिमालय के ऊपरी क्षेत्रों में ये पुष्प इस बार काफी मात्रा में खिले हैं। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर ने बताया कि केदारनाथ से वासुकीताल तक प्रकृति का सौंदर्य देखते ही बन रहा है। यहां विभिन्न प्रकार के फूलों के बीच ब्रह्मकमल व नीलकमल की संख्या सबसे अधिक है।
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क्या है नीलकमल
हिमालय क्षेत्रों में मिलने वाले चार कमल में नीलकमल भी शामिल है। इस पुष्प का वानस्पतिक नाम नेयम्फयस नॉचलि है। यह नीले रंग का होता है। इसे भगवान विष्णु का प्रिय पुष्प कहा जाता है। नीलकमल एशिया के दक्षिणी व पूर्वी देशों का पुष्प पादप है।
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