श्रीबदरीनाथ-श्रीकेदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) सुरक्षित उत्तराखंड के संदेश के साथ शीतकाल में अधीनस्थ मठ-मंदिरों की महत्ता का प्रचार-प्रसार भी करेगी। इस कार्य के लिए समिति ने कार्ययोजना बनाई है, जिसके तहत अधीनस्थ मठ-मंदिरों के महात्म्य के बारे में लोगों को बताया जाएगा।
बदरी-केदार और गंगोत्री-यमनोत्री के साथ-साथ अन्य मंदिरों में भी देश-विदेश के श्रद्धालु पहुंचे, इसके लिए बीकेटीसी ने कमर कस दी है। श्रीबदरीनाथ और श्रीकेदारनाथ धाम के रावल जहां दक्षिण भारत में इन दिनों ‘सुरक्षित उत्तराखंड सुरक्षित चारधाम’ का संदेश दे रहे हैं। वहीं समिति के कर्मचारी और पदाधिकारी देश के अलग-अलग प्रांतों व शहरों में उत्तराखंड में अधीनस्थ मंदिरों, मसलन माता मंदिर बदरीनाथ, श्रीशंकराचार्य मंदिर बदरीनाथ, विश्वनाथ मंदिर गुप्तकाशी, ऊषा मंदिर ऊखीमठ, महाकाली व महा सरस्वती मंदिर कालीमठ के महात्म्य के बारे में लोगों को बताएंगे।
बीकेटीसी के अधीन हैं 52 मंदिर
रुद्रप्रयाग। मंदिर समिति के अधीन 52 मंदिर है। इन मंदिरों में श्रीबदरीनाथ, श्री केदारनाथ के अलावा श्री नवदुर्गा मंदिर, बौराड़ी नई टिहरी, इंदे वर महादेव मंदिर, पैठाणी पौड़ी, बिंदेवर मंदिर, बिनसर पौड़ी, अनसूया मंदिर गोपेश्वर व चंद्रबदनी मंदिर देहरादून है। इसके अलावा श्रीबदरीनाथ मंदिर के अधीन 29 और श्रीकेदारनाथ मंदिर के अधीन 16 मंदिर भी है।
पूजा के बारे में भी मिलेगी जानकारी
रुद्रप्रयाग। बीकेटीसी श्रीबदरीनाथ धाम में होने वाली 25 प्रकार की पूजाओं और केदारनाथ धाम की 22 प्रकार की पूजाओं की जानकारी भी श्रद्धालुओं तक पहुंचाएगी। बदरीनाथ धाम में जहां महाभिषेक/अभिषेक, गीता पाठ, वेद पाठ, कपूर आरती, स्वर्ण आरती, चांदी की आरती, अष्टोत्तरी आदि पूजाएं प्रमुख हैं। वहीं केदारनाथ धाम में महाभिषेक, रुद्राभिषेक और लघु रुद्राभिषेक सहित अन्य पूजाएं शामिल हैं।
इनका कहना है -
चारधाम के अलावा अन्य 50 मंदिरों में भी श्रद्धालु पहुंचे, इसके लिए शीतकाल में वृहद प्रचार-प्रचार की योजना बनाई है। रावल जी सहित समिति के सभी लोग इस कार्य में जुटे हैं।
--बीडी सिंह, मुख्य कार्याधिकारी बीकेटीसी