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बारामासी पर्यटन से जुड़ेंगे प्राचीन मंदिर

Fri, 04 Dec 2015 04:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो रुद्रप्रयाग
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जून 2013 के जलप्रलय के बाद इस वर्ष पटरी पर लौटी चारधाम यात्रा को आने वाले समय में और वृहद रूप दिया जाएगा। बीकेटीसी ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है। शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध कालीमठ मंदिर और त्रियुगीनारायण को बारामासी तीर्थाटन से जोड़ने का निर्णय लिया गया है।
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 बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी बीडी सिंह का कहना है कि कालीमठ शक्तिपीठ और प्राचीन त्रियुगीनारायण मंदिर को यात्रा सहित बारामासी तीर्थाटन से जोड़ने का निर्णय लिया गया है। यहां पर मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए पूजा और प्रसाद काउंटर लगाए जाएंगे। मंदिरों की महिमा के साथ ही अन्य धार्मिक जानकारियों का इस शीतकाल में व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाएगा।

शक्तिपीठ कालीमठ  :
देवभूमि उत्तराखंड के प्रमुख सिद्धपीठ/शक्तिपीठ के रूप में प्रसिद्ध कालीमठ में मां काली का मंदिर नागर शैली में बना है। यहां महाकाली, महालक्ष्मी, महा सरस्वती के मंदिर के साथ ही हर गौरी मंदिर, भैरव मंदिर, मातंग शिला प्रमुख हैं। मंदिर के बीच में एक कुंड है, जो रजत पट से आच्छादित रहता है। यहां कुछ दूरी पर काली शिला मंदिर स्थित है, इस शिला में 64 यंत्र हैं, जिनसे शक्ति पुंज पैदा होते हैं। किवदंती यह है कि ब्रह्मा जी के वरदान से गर्वित असुर रक्तबीज के वध के लिए देवी दुर्गा इसी शिला पर महाकाली का रूप धर अवतरित हुई थीं।
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त्रियुगीनारायण मंदिर :
रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड राष्ट्रीय राजमार्ग पर सोनप्रयाग से अलग दिशा में 12 किमी की दूरी पर स्थित त्रियुगीनारायण का प्राचीन मंदिर है। मान्यता है कि यहां सतयुग में भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था, तब प्रज्ज्वलित अग्नि धूनी आज भी यहां निरंतर जल रही है। यह मंदिर शैव और वैष्णव संप्रदायों का आस्था का प्रमुख केंद्र भी है।
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