रुद्रप्रयाग और चमोली जनपद के गांवों से बाजार मूल्य पर ही काश्तकारों से चौलाई खरीदी जाएगी। यात्राकाल के प्रारंभ में दोनों धामों में पांच से 10 कुंतल तक चौलाई का भंडारण किया जाएगा। बाद में मांग के अनुरूप संबंधित ऊखीमठ और पांडुकेश्वर केंद्र से सप्लाई की जाएगी। दूसरी तरफ धामों में महाभिषेक, रुद्राभिषेक, स्वर्ण और चांदी की आरती सहित अन्य विशेष पूजा कराने वाले श्रद्धालुओं को समिति विशेष डिब्बों में चौलाई से बने उत्पाद भेंट करेगी। इसके अलावा इन्हें बाजार में भी उतारा जाएगा, जिससे समिति को आमदनी प्राप्त हो।
10-10 युवाओं को मिलेगा रोजगार
बीकेटीसी चौलाई से बनने वाले उत्पादों के लिए बदरी और केदार के लिए 10-10 युवाओं को सहकारिता के माध्यम से प्रशिक्षित कर उन्हें रोजगार देगी। समिति लघु-कुटीर उद्यमियों से भी बातचीत कर रही है, जो इन उत्पादों को अधिक से अधिक समय तक ठीक रखने में मदद करेंगे।
जनपद में चौलाई का उत्पादन
रुद्रप्रयाग जनपद में बीते दो वर्षों में चौलाई (रामदाना) का बुआई क्षेत्र और उत्पादन व्यापक रूप से बढ़ा है। वर्ष 2013-14 में जहां 53 हेक्टेयर में मात्र 35 मीट्रिक टन चौलाई का ही उत्पादन हुआ। वहीं 2014-15 में बुआई क्षेत्र बढ़कर 255 हेक्टेयर और उत्पादन 229 मीट्रिक टन तक पहुंच गया। इस वर्ष यात्रा में केदारनाथ में कैंटीन के लिए निम ने केदारघाटी के गांवों से 15 कुंतल से अधिक चौलाई खरीदी थी।
बदरी-केदार व मठ/मंदिरों में आगामी यात्रा से प्रसाद के रूप में चौलाई के लड्डू देना अनिवार्य कर दिया गया है। चौलाई से अन्य मिठाई व उत्पाद भी तैयार किए जाएंगे। इससे स्थानीय लोगों को को रोजगार भी मिलेगा।- बीडी सिंह, सीईओ बीकेटीसी