वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठान की परंपराओं के बीच बाबा केदार चल विग्रह डोली में विराजमान होकर रविवार को अपने धाम केदारनाथ के पहले पड़ाव फाटा के लिए प्रस्थान करेंगे। यहां रात्रि प्रवास के बाद 1 मई को भगवान की डोली गौरीकुंड के लिए रवाना होगी। 2 मई को डोली गौरीकुंड से केदारनाथ पहुंचेगी और तीन मई की सुबह 8:50 पर केदारनाथ धाम के कपाट खोल दिए जाएंगे।
पंचकेदार शीतकालीन गद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ में रविवार सुबह 7 बजे से विशेष पूजा-अनुष्ठान शुरू होगा। सुबह 8 बजे रावल भीमाशंकर की मौजूदगी में बाबा केदार की पंचमुखी भोग मूर्ति को गर्भगृह से सभामंडप में लाया जाएगा।
यहां पर विशेष पूजा-अर्चना होगी। केदारनाथ धाम के लिए नियुक्त प्रधान पुजारी पूजा करेंगे। इसके बाद बाबा केदार की भोग मूर्ति को चल विग्रह डोली में विराजमान किया जाएगा। ओंकारेश्वर मंदिर की तीन परिक्रमा के बाद भक्तों के जयकारे के बीच बाबा केदार अपने धाम केदारनाथ के लिए प्रस्थान करेंगे।
बाबा की डोली सुबह 11 बजे गुप्तकाशी स्थित विश्वनाथ मंदिर पहुंचेगी, जहां पर पुजारियों द्वारा विशेष पूजा होगी। इसके बाद नाला, मैखंडा सहित विभिन्न गांवों से होते हुए बाबा केदार की डोली रात्रि प्रवास के लिए पहले पड़ाव फाटा पहुंचेगी।
1 मई को डोली फाटा से गौरीकुंड और 2 मई को गौरीकुंड से केदारनाथ पहुंचेगी। 3 मई को केदारनाथ में विधि-विधान के साथ सुबह 8:50 पर भगवान केदारनाथ के कपाट खोले जाएंगे।