भगवान केदारनाथ की यात्रा निर्विघ्न संचालित हो, इस मनोकामना के साथ भगवान भैरवनाथ का भव्य श्रृंगार कर 11 विशेष दिव्य आरतियां की गईं। भगवान को पूरी-पकोड़ी की माला भी भेंट की गई।
शनिवार शाम 7 बजे से ओंकारेश्वर मंदिर में भगवान भैरवनाथ की पूजा-अर्चना से पूर्व गर्भ गृह में स्थित भगवान केदारनाथ, भगवान मद्महेश्वर एवं ओंकारेश्वर की पूजा और आरती की गई। इसके बाद मंदिर परिसर में भगवान भैरवनाथ के मंदिर में रावल भीमाशंकर की मौजूदगी में केदारनाथ के लिए नियुक्त प्रधान पुजारी बागेषलिंग ने छह माह की पूजा-अर्चना का संकल्प लिया।
इसके बाद वरिष्ठ पुजारी राजशेखरलिंग की मौजूदगी में शिव शंकरलिंग, गंगाधरलिंग, राजलिंग एवं गुरुलिंग द्वारा भगवान भैरवनाथ का जलाभिषेक, पंच अमृत स्नान तथा रुद्राभिषेक किया गया। तेल स्नान कराकर नया वस्त्र चढ़ाया गया।
वेद पाठी विवमोहन जमलोकी, आशा राम नौटियाल, नवीन मैठाण्ी, यशोधर मैठाणी और मृत्युंजय ने वेद-मंत्रोच्चार के साथ भगवान भैरवनाथ का पूरी-पकड़ी से बनी माला से श्रृंगार कर 11 आरतियों से आह्वान किया।
इसके बाद मंदिर में भक्तों को प्रसाद भेंट किया गया। इससे पूर्व भगवान केदारनाथ की पंचमुखी डोली कैलाश धाम विदा करने के लिए धवल पर्वत पर स्थित भगवान अष्टभैरव ओंकारेश्वर मंदिर के सभामंडप में विराजमान हुई। इस मौके पर देवता के पश्वा दीपक कुंवर सहित बीकेटीसी के कार्यधिकारी अनिल शर्मा, वाईएस पुष्पवाण, राजकुमार नौटियाल, पुष्कर रावत आदि मौजूद थे।