जनपद में संचालित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं। इसकी बानगी ऊखीमठ आईटीआई में देखने को मिल रही है। यहां 25 वर्ष से संस्थान को अपना भवन नहीं मिल पाया है। वहीं यूपी के समय स्वीकृत 8 ट्रेडों में अब सिर्फ दो ही संचालित हो रहे हैं।
युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए औद्योगिक प्रशिक्षण के उद्देश्य से संचालित आईटीआई खानापूर्ति साबित हो रहे हैं। संसाधन विहीन संस्थानों में प्रशिक्षण ले रहे युवाओं का भविष्य अंधकारमय हो रहा है। वर्ष 1989 में ऊखीमठ में स्वीकृत आईटीआई का 1991 में संचालन शुरू हुआ। तब संस्थान में मोटर मैकेनिक, इलैक्टिशियन, पलंबर, वायरमैन, रेडियो/टीवी मैकेनिक, आशुलिपि हिंदी और सिलाई-कटिंग स्ंिवग ट्रेड स्वीकृति दी गई थी। वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद अब तक संस्थान को अपना भवन नसीब नहीं हो पाया। जबकि वन विभाग ने वर्ष 2006-07 में किमाणा गांव के चारी तोक में संस्थान के लिए 48 नाली भूमि दी थी। आईटीआई में वर्तमान में सिर्फ आशुलिपि हिंदी और सिलाई-कटिंग ट्रेड ही चल रहे हैं, जिसमें क्रमश 10 और 6 युवतियां प्रशिक्षण ले रही हैं। टीन शेड में शौचालय और पानी की व्यवस्था भी नहीं हैं।
इनका कहना है -
संस्थान का संचालन रुद्रप्रयाग आईटीआई से हो रहा है। जरूरी सुविधाओं के लिए उच्चाधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। लेकिन सुध नहीं ली जा रही है।
-- डीएस नेगी, प्रभारी आईटीआई ऊखीमठ