एक ओर जहां जिले में सरकारी शिक्षा की तस्वीर अब भी धुंधली है। वहां, ग्राम पंचायत ब्यूंखी का आंगनबाड़ी केंद्र नई उम्मीदें जगा रहा है। एकमात्र ऐसा आंगनबाड़ी केंद्र जो स्वयं में आदर्श होने के साथ शिक्षा के सबसे छोटे स्तर पर पूरी तरह से खरा उतर रहा है।
ऊखीमठ तहसील के कालीमठ घाटी में बसा ग्राम पंचायत ब्यूंखी, जो अपनी विषम भौगोलिकता के कारण सड़क, स्वास्थ्य, बैंक जैसी बुनियादी जरूरतों से वंचित है। वहीं, गांव का आंगनबाड़ी केंद्र सुनहरे भविष्य की कोशिश कर रहा है। यहां बचपन को जिस तरह से पंख लग रहे हैं, वह अपने आप में सुखद है।
वर्ष 2011 में महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से ब्यूंखी गांव में आंगनबाड़ी केंद्र खोला गया, जिसे वर्ष 2014 में अपना भवन भी मिल गया। वर्तमान सत्र में केंद्र में तीन से पांच वर्ष के 11 बच्चे पंजीकृत हैं। आंगनबाड़ी कार्यकत्री रेखा रौथाण और सहायिका, जिस तरीके से बच्चों के बौद्धिक विकास को बढ़ाने के लिए बेहतर प्रयोग कर रही है वह एक मिसाल बन रहा है।
जिला पंचायत सदस्य संगीता नेगी कहती हैं, आंगनबाड़ी केंद्र कालीमठ घाटी की पहचान बन रहा है। वहीं ग्राम प्रधान सुलोचना देवी का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र गांव को भी नई पहचान दे रहा हे।
रुद्रप्रयाग में 692 आंगनबाड़ी केंद्र
जिले में 692 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हो रहे हैं, जिसमें 87 के पास ही अपने भवन है। ग्राम पंचायत कुरछोला, बक्सीर सहित कई केंद्र खुले आसमान के नीचे संचालित हो रहे हैं। 176 केंद्र प्राइमरी स्कूल और अन्य केंद्र गांवों के पंचायत भवन, मिलन केंद्र व किराए के भवनों पर हैं।
ग्राम पंचायत ब्यूंखी का आंगनबाड़ी केंद्र जिले के लिए भी मिसाल बन रहा है। केंद्र के बेहतर संचालन के साथ उम्र के हिसाब से बच्चों का बौद्धिक विकास भी अच्छा है। यह अन्य के लिए भी प्रेरणा लेने लायक है।
- धर्मवीर सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी रुद्रप्रयाग
आंगनबाड़ी केंद्र ब्यूंखी की खूबियां
- कक्षा कक्ष की दीवार पर चित्रों के साथ उकेरी गई अक्षर वर्णमाला बच्चों के लिए मददगार साबित हो रही है।
- प्रतिमाह माताश्री बैठक, जिसमें बच्चों के बौद्धिक विकास व अन्य गतिविधियों पर होती है चर्चा।
- बच्चे देश, राज्य व जिले के बारे में अपनी उम्र के हिसाब से काफी कुछ जानते हैं।
- केंद्र में बच्चों के लिए पर्याप्त खेल सामग्री, जिसमें हैंडबॉल, कैरम, शतरंज आदि प्रमुख हैं।
- बच्चों को सिखाया जाता है व्यायाम व योगासन।
- केंद्र का पूरे सीजन नियमित प्रात: 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक संचालन।
- बैठने के लिए फर्नीचर व भोजन के लिए टाट-पट्टी उपलब्ध है।
- प्रतिदिन बच्चों को अलग-अलग पौष्टिक आहार दिया जाता है, जिसमें खिचड़ी, दलिया, पुलाव, हलवा, गुड़-चना, दाल-चावल, सोयाबीन आदि दिया जाता है।
- साफ-सफाई से पठन-पाठन की व्यवस्था दूरस्थ क्षेत्र होने के बावजूद अनुशासन से बंधी हुई।