रुद्रप्रयाग। अगस्त्यमुनि विकासखंड के पट्टी बच्छणस्यूं के महड़ गांव में पंचमुखी शिवलिंग है। खास बात यह है कि यहां समाधि स्थल भी मौजूद हैं, लेकिन प्रचार-प्रसार के अभाव में यह धार्मिक धरोहर श्रद्धालुओं की नजरों से ओझल है।
मान्यता है कि मड़मुख शिवालय समेत यहां मौजूद अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों का निर्माण पांडवों द्वारा किया गया था। यहां पर स्वयंभू पंचमुखी शिवलिंग है। मंदिर के गर्भगृह का क्षेत्र प्राचीन पत्थरों की दीवार से बना हुआ है। साथ ही यहां धूनी भी मौजूद है। गांव के भगवान सिंह गुसाईं, राजपाल सिंह गुर्साइं, जसपाल पंवार, कलम सिंह, अनूप सिंह, भरत पटवाल ने बताया कि उनके पूर्वज बताते थे कि पूर्व में शिवालय से कुछ दूरी पर श्मशान घाट था, जहां कोई शवदाह होता था तो चिता से उठने वाला धुआं समाधि स्थल से बाहर निकलता था। आज भी मंदिर परिसर में समाधि के अवशेष मौजूद हैं। मंदिर पत्थरों से बना है, लेकिन भूकंप, भूधंसाव व अन्य प्राकृतिक आपदाओं का कोई असर नहीं हुआ है। प्रधान संगीता देवी चौधरी का कहना है कि मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए प्रस्ताव तैयार किया गया है। जिला योजना से कुछ धनराशि स्वीकृति हुई है। बरसात के बाद कार्य किय जाएगा।