अगस्त्यमुनि। सेमी और चंद्रापुरी गांवों को पूर्ण विस्थापन की सूची में शामिल करने के बावजूद शासन स्तर पर ठोस प्रयास न होने पर ग्रामीणों ने रोष जताया। लक्ष्मी नारायण मंदिर चंद्रापुरी में हुई बैठक में केदार हिमालय विकास संघर्ष समिति ने कहा कि केदारनाथ आपदा के बाद से चंद्रापुरी गांव पर चारों ओर से संकट में है। बावजूद इसके सरकार ठोस कार्रवाई के बजाय लोगों को यहीं मकान बनाने के लिए प्रेरित कर रही है। कहा कि सरकार अगर गैरसैंण, ऋषिकेश, देहरादून के किसी भी क्षेत्र में विस्थापित करे तो लोग अपनी नाप व पंचायती भूमि छोड़ने को तैयार हैं।
चंद्रापुरी की ग्राम प्रधान सुलोचना देवी की अध्यक्षता में हुई बैठक में वक्ताओं का कहना था कि चंद्रापुरी गांव के ऊपर की ओर से भूस्खलन हो रहा है। दाहिने ओर ढालसिंगी गदेरे से भी कटाव हो रहा है। इस मौके पर चंद्रापुरी से पाली-रयांसू पैदल मार्ग के नीचे मंदाकिनी नदी किनारे आरसीसी दीवार बनाने की मांग भी की गई। चंद्रापुरी में आपदा में बहे पैदल पुल के स्थान नए झूला पुल बनाने में आ रही मुश्किलों को दूर करने के लिए भी प्रशासन से उचित कार्रवाई का आग्रह किया गया। कहा गया कि पुल के अभाव में जीवन अस्त-व्यस्त होकर रह गया है। समस्याओं के निराकण को सामूहिक प्रयास का निर्णय लिया गया। कहा गया कि जरूरत पड़ने पर कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा। संघर्ष समिति के अध्यक्ष गगनजीत सिंह बिष्ट, उपाध्यक्ष सुशीला भंडारी, दर्शन सिंह बिष्ट, शिव सिंह भंडारी, बीरेंद्र लाल, प्रेम लाल, नारायण दत्त आदि मौजूद थे।