रुद्रप्रयाग। जनपदीय संस्कृत विद्यालय अध्यापक समिति ने संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों की दुर्दशा पर रोष प्रकट किया है। समिति ने सामान्य पाठ्यक्रम और संस्कृत विद्यालयों/ महाविद्यालयों में भेदभाव समाप्त करने की मांग की।
जिला मुख्यालय स्थित संस्कृत महाविद्यालय में हुई बैठक में विभिन्न महाविद्यालयों से आए शिक्षक प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस मौके पर वक्ताओं ने संस्कृत भाषा की उपेक्षा पर निराशा जताई। उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यालयों में 12 कक्षाएं संचालित होती हैं, लेकिन शिक्षकों के मात्र 3-4 पद ही स्वीकृत हैं। शिक्षकों की कमी के चलते बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि विद्यालय भवन जीर्ण-शीर्ण हो चुके हैं। सब कुछ देखते हुए भी शासन द्वारा अनुरक्षण अनुदान नहीं दिया जा रहा है।
शिक्षकों ने शासन से अनुरक्षण अनुदान देने, विद्यालयों में कक्षाओं के अनुसार पद स्वीकृत करने और नवनियुक्त शिक्षकों को अंशदायी पेंशन योजना का लाभ देने की मांग शासन से की। बैठक में समिति के सचिव डा. सुरेश चरण बहुगुणा, मोहन शर्मा, दिनेश, जगदंबा प्रसाद, बल्लभ पुरोहित, सुमन जमलोकी, टीकाराम, राम प्रसाद, चंद्रकला और डा. भानुप्रकाश आदि ने विचार रखे।