रुद्रप्रयाग। 13/14 सितंबर की रात्रि प्राकृतिक आपदा की मार झेलने वाले लोगों को भविष्य की चिंता सता रही है। अभी तक तो शासन-प्रशासन, स्वयंसेवी संस्थाओं से मिली मदद से काम चल रहा हैं, लेकिन आने वाले समय में कैसे रोजी-रोटी या रहने के लिए मकान का प्रबंध हो पाएगा। यह सवाल उनको परेशान कर रहा है।
प्रभावित क्षेत्र के चुन्नी गांव की सुनीता देवी (38) और अनुसूया देवी (40) का तो दो जून की रोटी का सहारा आपदा ने छीन लिया है। दो बेटी और एक बेटे की माता सुनीता देवी के पति का देहांत 15 साल पूर्व हो गया था। आपदा से पूर्व वह अपने 10 नाली खेत और भैंस का दूध बेचकर परिवार पालती थी, लेकिन बाढ़ में खेत और गोशाला बह गई। तीन कमरों के मकान में मलबा भर गया। अब स्थिति यह है कि न तो रहने के लिए घर और न ही खेत खेती लायक। सुनीता बच्चों के साथ रिश्तेदारों के घर में रह रही है। जमीन पूरी बह जाने पर उसकी बहन ने पीएसआई द्वारा बनाए जा रहे टिन शेड के लिए उसे भूमि दी।
वहीं अनुसूया देवी के पति की मौत 22 साल पूर्व हो गई थी। आपदा में अनुसूया का भवन पूर्ण रुप से ध्वस्त हो गया है। 10 नाली कृषि भूमि में से सिर्फ तीन नाली भूमि बची है। अनुसूया का भी आय का कोई साधन नहीं है। प्रभावितों को एनसीआरएफ के मानकों के तहत आर्थिक मदद के साथ अन्य मदद मिली है, लेकिन रोजगार का क्या होगा। इसका कोई ठोस जवाब अधिकारियों के पास नहीं है।
रोजगार देने के हो प्रयास
रुद्रप्रयाग। ऊखीमठ में प्रभावितों के लिए टिन शेड का निर्माण कर रही अदन संस्था कीर्तिनगर के सचिव रणजीत सिंह जाखी और पनबस संस्था रुद्रप्रयाग की अध्यक्ष मीना बहन का कहना है कि प्रभावितों के रोजगार के लिए प्रयास किए जाने चाहिए। ताकि वे परिवार का गुजर बसर कर सके।
मलबा हटाने में हो जाएंगे 50-60 हजार खर्च
रुद्रप्रयाग। मानकों के तहत मिली आर्थिक मदद तो घरोें का मलबा साफ करने के लिए अपर्याप्त है। सुनीता देवी को भवन की गंभीर क्षति पर 6300 रुपये मिले हैं। उनके घर में अभी भी मलबा भरा हुआ है। यदि वह मलबा हटाने के लिए मजदूर लगाती हैं, तो प्रति मजदूर 350 रुपये देने पडे़ंगे। मलबा हटाने में ही 50-60 हजार रुपये खर्च हो जाएंगे। यदि मलबा हटाया जाता भी है, तो दरारों के कारण यहां रहना खतरे से खाली नहीं है।
फिलहाल रहने के लिए टिन शेड हो गया है। बिस्तर भी पर्याप्त हैं। कुछ समय के लिए राशन भी है, लेकिन आगे क्या होगा, समझ में नहीं आ रहा है। एक दिन राशन खत्म हो जाएगा, तब क्या होगा। रोजगार के लिए कुछ साधन चाहिए। -सुनीता देवी प्रभावित
एनसीआरएफ (केंद्रीय संकटमोचन निधि) के मानकों के तहत, जन-धन की हानि और कृषि भूमि के नुकसान पर अनुदान दिया गया है। घरों से मलबे की सफाई का एनसीआरएफ में प्राविधान नहीं है।
-राकेश तिवारी, एसडीएम ऊखीमठ